कार्तिक मास में तुलसी की महिमा 

ब्रह्मा जी कहते हैं – “जो भक्त कार्तिक महीने में ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान कर पवित्र हो तुलसी दल से

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सिद्ध कुंजिका स्तोत्र

शिव उवाच  श्रृणु देवि प्रवक्ष्यामि कुंजिकास्तोत्रमुत्तमम् । येन मन्त्रप्रभावेण चण्डिजाप: शुभो भवेत् ।।1।। अर्थ – शिवजी बोले – देवी! सुनो,

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महालक्ष्म्यष्टकम् 

इन्द्र उवाच  नमस्तेSस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते । शंखचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोSस्तु ते ।।1।। अर्थ – इन्द्र बोले – श्रीपीठ पर स्थित

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श्रीलक्ष्मी स्तोत्रम्

श्रीलक्ष्मी स्तोत्रम् सिंहासनगत: शक्रस्सम्प्राप्य त्रिदिवं पुन: । देवराज्ये स्थितो देवीं तुष्टावाब्जकरां तत: ।।1।। अर्थ – इन्द्र ने स्वर्गलोक में जाकर

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