अथ वेदोक्तं रात्रिसूक्तम्
ऊँ रात्रीत्याद्यष्टर्चस्य सूक्तस्य कुशिक: सौभरो रात्रिर्वा भारद्वाजो ऋषि:, रात्रिर्देवता, गायत्री छन्द:, देवीमाहात्म्यपाठे विनियोग: । ऊँ रात्री व्यख्यदायती पुरुत्रा देव्यक्षभि: ।
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ऊँ रात्रीत्याद्यष्टर्चस्य सूक्तस्य कुशिक: सौभरो रात्रिर्वा भारद्वाजो ऋषि:, रात्रिर्देवता, गायत्री छन्द:, देवीमाहात्म्यपाठे विनियोग: । ऊँ रात्री व्यख्यदायती पुरुत्रा देव्यक्षभि: ।
ऊँ अस्य श्रीकीलकमन्त्रस्य शिव ऋषि:, अनुष्टुप् छन्द:, श्रीमहासरस्वती देवता, श्रीजगदम्बाप्रीत्यर्थं सप्तशतीपाठांगत्वेन जपे विनियोग: । ऊँ नमश्चण्डिकायै ।। मार्कण्डेय
1) ऊँ ऎं हृीं श्रीं श्रीमात्रे नम: । 2) ऊँ ऎं हृीं श्रीं श्रीमहाराज्ञ्यै नम: । 3) ऊँ ऎं हृीं
हिन्दु नववर्ष (विक्रम संवत) के आरंभ से ही चैत्र नवरात्र का आरंभ भी हो जाता है. दिनाँक दिन तिथि 13
20 नवंबर 2026 को देवऊठनी एकादशी अथवा हरिप्रबोधिनी एकादशी मनाई जाएगी (21 नवंबर को भी एकादशी हैं – वैष्णव) कार्तिक
वर्ष 2026 में भैया दूज 11 नवंबर, दिन बुधवार को मनाई जाएगी. यह त्यौहार कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की