श्रीहनुमत्सहस्त्रनाम स्तोत्रम
हनुमान्श्रीप्रदो वायुपुत्रो रुद्रोsनघोsजर: । अमृत्युर्वीरवीरश्च ग्रामवासो जनाश्रय: ।।1।। धनदो निर्गुणोsकायो वीरो निधिपतिर्मुनि: । पिंड्गाक्षो वरदो वाग्मी सीताशोकविनाशन: ।।2।। शिव: सर्व:
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हनुमान्श्रीप्रदो वायुपुत्रो रुद्रोsनघोsजर: । अमृत्युर्वीरवीरश्च ग्रामवासो जनाश्रय: ।।1।। धनदो निर्गुणोsकायो वीरो निधिपतिर्मुनि: । पिंड्गाक्षो वरदो वाग्मी सीताशोकविनाशन: ।।2।। शिव: सर्व:
श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभव दारुणं । नवकंज-लोचन, कंजमुख, कर-कंज, पद कंजारुणं ।। कंदर्प अगणित अमित छबि, नवनील-नीरद-सुंदरं ।
जय भगवति देवि नमो वरदे, जय पापविनाशिनि बहुफलदे । जय शुम्भ-निशुम्भ-कपालधरे, प्रणमामि तु देवि नरार्तिहरे ।।1।। जय चन्द्रदिवाकर नेत्रधरे, जय
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रान्विता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना । या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवै: सदा वन्दिता सा मां पातु सरस्वती भगवती नि:शेषजाड्यापहा ।।1।।
यह श्री सूक्तं ऋग्वेद से लिया गया है. ऊँ हिरण्यवर्णा हरिणीं सुवर्णरजतस्त्रजाम । हिरण्मयीं लक्ष्मीं जात्वेदो म आ वह
अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते गिरिवरविन्ध्य शिरोsधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते । भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकृते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्य कपर्दिनि