शिवपंचाक्षर स्तोत्रम
नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय, भस्मांगरागाय महेश्वराय । नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय, तस्मै ‘न’काराय नम: शिवाय ।।1।। मन्दाकिनी-सलिल-चन्दन-चर्चिताय, नन्दीश्वर-प्रमथनाथ-महेश्वराय । मन्दारपुष्प – बहुपुष्प –
Astrology, Mantra and Dharma
नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय, भस्मांगरागाय महेश्वराय । नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय, तस्मै ‘न’काराय नम: शिवाय ।।1।। मन्दाकिनी-सलिल-चन्दन-चर्चिताय, नन्दीश्वर-प्रमथनाथ-महेश्वराय । मन्दारपुष्प – बहुपुष्प –
आरती करत जनक कर जोरे, बड़े भाग्य रामजी घर आए मोरे.. जीत स्वयंवर धनुष चढ़ाए, सब भूपन के गर्व मिटाए..
कहं लगि आरती दास करेंगे, सकल जगत जाकी जोत विराजे, सात समुद्र जाके चरणनि बसे, कहा भये जल कुम्भ भरे
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भव भय दारुणं. नव कंजलोचन, कंज – मुख, कर – कंज, पद कंजारुणं.. कंन्दर्प
आरती श्री रामायणजी की.. कीरति कलित ललित सिय पी की.. गावत ब्रह्मादिक मुनि नारद.. बालमीक बिग्यान बिसारद.. सुक सनकादि सेष
ॐ जय गंगे माता श्री जय गंगे माता… जो नर तुमको ध्याता मनवांछित फल पाता… चंद्र सी जोत तुम्हारी जल