रामायण – मनका 108
इस पाठ की एक माला प्रतिदिन करने से मनोकामना पूर्ण होती है, ऎसा माना गया है. रघुपति राघव राजाराम ।
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इस पाठ की एक माला प्रतिदिन करने से मनोकामना पूर्ण होती है, ऎसा माना गया है. रघुपति राघव राजाराम ।
ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिंग निर्मलभासित शोभितलिंगम । जन्मजदु:खविनाशकलिंगं तत्प्रणमामि सदाशिवलिंगम ।।1।। देवमुनिप्रवरार्चितलिंगं कामदहं करुणाकरलिंगम । रावणदर्पविनाशन लिंगं तत्प्रणमामि सदाशिवलिंगम ।।2।। सर्वसुगंधिसुलेपित लिंगं बुद्धि
सूर्योsर्यमा भगस्त्वष्टा पूषार्क: सविता रवि: । गभस्तिमानज: कालो मृत्युर्धाता प्रभाकर: ।।1।। पृथिव्यापश्च तेजश्च खं वयुश्च परायणम । सोमो बृहस्पति: शुक्रो
अथ ध्यानम कस्तूरीतिलकं ललाटपटले वक्ष:स्थले कौस्तुभं नासाग्रे वरमौत्तिकं करतले वेणुं करे कंकणम । सर्वाड़्गे हरिचन्दनं सुललितं कण्ठे च मुक्तावलि –
जय शिव ओंकारा, हर जय शिव ओंकारा । ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा ।। जय शिव…. एकानन चतुरानन पंचानन राजे
सिन्दूरपूररुचिरो बलवीर्यसिन्धु – र्बुद्धिप्रवाहनिधिरद्भुतवैभवश्री: । दीनार्तिदावदहनो वरदो वरेण्य: संकष्टमोचनविभुस्तनुतां शुभं न: ।। सोत्साहलड़्घितमहार्णवपौरुषश्री – र्लड़्कापुरीप्रदहनप्रथितप्रभाव: । घोराहवप्रमथितारिचमूप्रवीर: प्राभंजनिर्जयति मर्कटसार्वभौम: ।।