महाभागवत – देवी पुराण – अठत्तरवाँ अध्याय
श्रीमहादेव जी बोले – वहाँ भगवती कामाख्या के शक्तिपीठ में जो व्यक्ति वैशाख की तृतीया तिथि को भगवती चण्डिका की
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श्रीमहादेव जी बोले – वहाँ भगवती कामाख्या के शक्तिपीठ में जो व्यक्ति वैशाख की तृतीया तिथि को भगवती चण्डिका की
श्रीनारदजी बोले – महेश्वर ! कामरूप महाक्षेत्र में दस महाविद्याओं की अधिष्ठात्री देवी महेश्वरी कौन है? उनके विषय में बताइये।।1।।
श्रीनारदजी बोले – प्रभो ! देव ! जगन्नाथ ! आपके मुखकमल से भगवती गङ्गा के अतुलनीय माहात्म्य को सुनकर मैं
श्रीनारदजी बोले – परमेश्वर ! आपने बताया की ‘गङ्गा’ नाम परम पुण्यदायी है। गङ्गा के और भी कितने श्रेष्ठ नाम
श्रीमहादेवजी बोले – मुनिश्रेष्ठ ! ज्ञानपूर्वक गङ्गा में देहत्याग करने वाला मनुष्य पाप से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त कर लेता
श्रीमहादेव जी बोले – मुनिश्रेष्ठ ! ब्रह्महत्या करने वाला, गोवध करने वाला, सुरापान करने वाला तथा गुरु पत्नीगामी महापापी भी