महाभागवत – देवी पुराण – बहत्तरवाँ अध्याय
श्रीमहादेव जी बोले – ये पुण्यमयी गङ्गा अपना दर्शन करने तथा अपने जल का स्पर्श करने मात्र से प्राणियों के
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श्रीमहादेव जी बोले – ये पुण्यमयी गङ्गा अपना दर्शन करने तथा अपने जल का स्पर्श करने मात्र से प्राणियों के
श्रीमहादेवजी बोले – महामुने ! तब भगवती गङ्गा समुद्र के साथ संयुक्त हो विवर से होकर अत्यन्त प्रसन्नतापूर्वक पाताल पहुँचकर
श्रीमहादेव जी बोले – इस प्रकार महादेवी गङ्गा बहुत योजन दूरी को पारकर उन महात्मा राजा भगीरथ के साथ हरिद्वार
श्रीमहादेव जी बोले – ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को महापापी जनों के भी उद्धार के लिए
श्रीमहादेवजी बोले – महामुने ! इस प्रकार पुण्यात्मा राजा भगीरथ ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में हस्त नक्षत्र से युक्त
भगीरथ बोले – पार्वतीनाथ, देवदेव,परात्पर,अच्युत, अनघ, पञ्चास्य, भीमास्य, रुचिरानन, ओंकारस्वरूप आपको नमस्कार है। व्याघ्राजिनधर, अनन्त, पारावारविवर्जित, पञ्चानन, महासत्त्व, महाज्ञानमय, प्रभु