महाभागवत – देवीपुराण – चालीसवाँ अध्याय
श्रीमहादेव जी बोले – विभीषण को पूर्णरूप से शरणागत जानकर महाबाहु श्रीराम ने उसके साथ मैत्री स्थापित की और उसे
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श्रीमहादेव जी बोले – विभीषण को पूर्णरूप से शरणागत जानकर महाबाहु श्रीराम ने उसके साथ मैत्री स्थापित की और उसे
श्रीमहादेवजी बोले – मारीच को मारकर जब श्रीराम लक्ष्मण के साथ जब अपनी पर्णकुटी पर आए, तब उन्होंने वहां जानकी
श्रीमहादेवजी बोले – नारदजी ! मुनिश्रेष्ठ वसिष्ठ जी ने महाबाहु राम, लक्ष्मण, भरत तथा शत्रुघ्न को देवी के मंत्र की
श्रीमहादेव जी बोले – भगवती के ऐसे वचन सुनकर नेत्रों में आह्लाद भरे हुए भगवान विष्णु ने उन्हें भक्तिपूर्वक पुनः
नारदजी बोले – महादेव ! विश्वनाथ ! आपने जिस वार्षिकी शारदीय महापूजा की बात बताई थी, जिसे रघुवर भगवान श्रीराम
प्रारंभ काल