कामाक्षी माहात्म्यम
स्वामिपुष्करिणीतीर्थं पूर्वसिन्धुः पिनाकिनी। शिलाह्रदश्चतुर्मध्यं यावत् तुण्डीरमण्डलम् ।।1।। मध्ये तुण्डीरभूवृत्तं कम्पा-वेगवती-द्वयोः। तयोर्मध्यं कामकोष्ठं कामाक्षी तत्र वर्तते ।।2।। स एव
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स्वामिपुष्करिणीतीर्थं पूर्वसिन्धुः पिनाकिनी। शिलाह्रदश्चतुर्मध्यं यावत् तुण्डीरमण्डलम् ।।1।। मध्ये तुण्डीरभूवृत्तं कम्पा-वेगवती-द्वयोः। तयोर्मध्यं कामकोष्ठं कामाक्षी तत्र वर्तते ।।2।। स एव
हर ग्रह का अपना एक मंत्र हैं और मंत्रों का जाप कितनी संख्या में करना चाहिए यह भी हर ग्रह
राहु/केतु एक ही राक्षस था जिसका नाम स्वरभानु था. समुद्र मंथन के समय देवताओं को राक्षसों की सहायता लेनी पड़ी
पंचक – 2020 जब पंचक नक्षत्र चल रहे हों तब दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करना, मकान आरंभ करना, दुकान
गजेन्द्र मोक्ष का महत्व गजेन्द्र मोक्ष की पौराणिक कथा महर्षि वेद व्यास द्वारा रचित भगवत पुराण के तीसरे अध्याय में
जो व्यक्ति वास्तव मे ज्योतिष के विषय की पारखी नजर रखता है वो महर्षि पराशर के नाम से अवश्य परिचित