आरती श्रीकृष्णचन्द्र की
आरती युगल किशोर की कीजै, राधे धन न्यौछावर कीजै ।।टेक।। रवि शशि कोटि बदन की शोभा, तेहि निरख मेरा
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आरती युगल किशोर की कीजै, राधे धन न्यौछावर कीजै ।।टेक।। रवि शशि कोटि बदन की शोभा, तेहि निरख मेरा
भये प्रकट कृपाला, दीनदयाला, कौशिल्या हितकारी। हरषित महतारी, मुनिमन हारी, अदभुत रूप बिचारी।। लोचन अभिरामा, तनु घनश्यामा, निज आयुध भुजचारी।
आरती श्रीकृष्ण कन्हैया की, मथुरा-कारागृह-अवतारी, गोकुल जसुदा-गोद-विहारी, नंदलाल नटवर गिरिधारी, वासुदेव हलधर-भैया की ।। आरती ।। मोर-मुकुट पीताम्बर छाजै, कटि
जय लक्ष्मी-विष्णो । जय लक्ष्मीनारायण, जय लक्ष्मी-विष्णो । जय माधव, जय श्रीपति, जय, जय, जय विष्णो ।। जय. ।।
आरती कीजै हनुमान लला की | दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥ जाके बल से गिरवर काँपे | रोग दोष
ऊँ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे ।। टेक ।। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे ।।