आरती सोमवार की
आरती करत जनक कर जोरे, बड़े भाग्य रामजी घर आए मोरे.. जीत स्वयंवर धनुष चढ़ाए, सब भूपन के गर्व मिटाए..
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आरती करत जनक कर जोरे, बड़े भाग्य रामजी घर आए मोरे.. जीत स्वयंवर धनुष चढ़ाए, सब भूपन के गर्व मिटाए..
कहं लगि आरती दास करेंगे, सकल जगत जाकी जोत विराजे, सात समुद्र जाके चरणनि बसे, कहा भये जल कुम्भ भरे
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भव भय दारुणं. नव कंजलोचन, कंज – मुख, कर – कंज, पद कंजारुणं.. कंन्दर्प
आरती श्री रामायणजी की.. कीरति कलित ललित सिय पी की.. गावत ब्रह्मादिक मुनि नारद.. बालमीक बिग्यान बिसारद.. सुक सनकादि सेष
ॐ जय गंगे माता श्री जय गंगे माता… जो नर तुमको ध्याता मनवांछित फल पाता… चंद्र सी जोत तुम्हारी जल
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की……… गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला. श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद