तुलसी माता की आरती
जय जय तुलसी माता, सबकी सुखदाता वर माता। सब योगों के ऊपर, सब रोगों के ऊपर, रज से रक्षा करके
Astrology, Mantra and Dharma
जय जय तुलसी माता, सबकी सुखदाता वर माता। सब योगों के ऊपर, सब रोगों के ऊपर, रज से रक्षा करके
आरती युगलकिशोर की कीजै। तन मन धन न्यौछावर कीजै॥ गौरश्याम मुख निरखन लीजै। हरि का रूप नयन भर पीजै॥ रवि
ऊँ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु जय श्री विश्वकर्मा । सकल सृष्टि के कर्ता रक्षक श्रुति धर्मा ॥1॥ आदि सृष्टि में
जय लक्ष्मी रमणा, जय श्रीलक्ष्मी रमणा । सत्यनारायण स्वामी जन – पातक – हरणा ।। जय ।। टेक रत्नजटित सिंहासन
जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी । तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ।। मांग सिंदूर विराजत, टीको मृदमद
जय शिव ओंकारा, हर जय शिव ओंकारा । ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा ।। जय शिव…. एकानन चतुरानन पंचानन राजे