मंगल के लिए मंत्र
ज्योतिष में सभी नौ ग्रह का अपना विशिष्ट महत्व होता है. सभी ग्रह अपनी दशा/अन्तर्दशा में अपने फल प्रदान करने
Astrology, Mantra and Dharma
ज्योतिष में सभी नौ ग्रह का अपना विशिष्ट महत्व होता है. सभी ग्रह अपनी दशा/अन्तर्दशा में अपने फल प्रदान करने
बुध ग्रह को ग्रहों में राजकुमार की उपाधि दी गई है लेकिन जन्म कुंडली में यदि बुध अशुभ ग्रहों के
वर्तमान समय में शनि देव के विषय में बहुत सी भ्रांतियाँ लोगों में फैली हुई है. हर कोई शनि देव
शनि के लिए वैदिक मंत्र “ऊँ शं नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये । शं योरभि स्रवन्तु न:” शनि का मूल
जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम । तमोSरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोSस्मि दिवाकरम ।। दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णव सम्भवम । नमामि शशिनं सोमं शंभोर्मुकुट भूषणं ।।
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