कार्तिक माह में राई दामोदर की कहानी

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krishn901

एक समय की बात है एक छोटी सी लड़की थी जो कार्तिक नहाया करती थी. कार्तिक का महीना पूरा हुआ तो सब कहने लगी कि गंगा जी जाए या जमुना जी जाए या हरिद्वार होकर आए? एक स्त्री बोली कि मैं तो राई दामोदर भगवान को जिमाऊँगी. सब पूछने लगी कि वे कैसे होते है? स्त्री बोली कि मोर मुकुट, गले में वैजयन्ती माला और हाथ में पीताम्बर ऎसे होते हैं राई दामोदर भगवान. वह लड़की अपने घर आई भगवान की रसोई बनाई, मन्दिर में आई. बोली – आओ मेरे भगवान आओ जीमों. मन्दिर में भगवान नहीं मिले, मन्दिर से शहर में गई, शहर से जंगल गई, जंगल से पहाड़ो पर चढ़ गई. भगवान को पुकारते सुबह से शाम हो गई.

भगवान लड़की को पहाड़ पर चढ़ते देख बोले कि यह तो ऊपर से गिरकर मर जाएगी और मेरे सिर इसकी हत्या लगेगी. इसे दर्शन देने ही होगें. भगवान ब्राह्मण का रूप धरकर आए और बोले चल बेटा, मैं तेरा भगवान हूँ तू मुझे जिमा दे. लड़की बोली कि नहीं, तुम मेरे भगवान नहीं हो. ब्राह्मण बोला कि तेरे भगवान कैसे है? उसने कहा – मेरे भगवान तो मोर मुकुट वाले, गले में वैजयन्ती माला पहने हुए और हाथ में पीताम्बर लिए हुए हैं. ब्राह्मण बोला – अच्छा! ऎसे हैं तेरे भगवान. हाँ, ऎसे हैं मेरे भगवान !

अब भगवान ने लड़की के सामने अपना चतुर्भुजी रुप दिखाया. अब लड़की खुश हो गई और बोली कि हाँ, तुम ही हो मेरे भगवान. अब आगे-आगे वह छोटी लड़की भाग रही थी और पीछे भगवान आ रहे थे. भागते-भागते सँग की सहेलियों से बोली कि मेरे घर मेरे भगवान आए हैं. उनमें से किसी एक ने कहा कि देखो तो इसके भगवान कैसे है? जिनके भाग्य में भगवान के दर्शन लिखे थे उन्हें हो गए.

हे राई दामोदर भगवान ! जैसे आपने लड़की को दर्शन दिए वैसे ही सभी को देना.

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