श्री लक्ष्मी चालीसा
दोहा मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो ह्रदय में बास । मनोकामना सिद्ध करि, पुरवहु मेरी आस ।। सोरठा यही मोर
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दोहा मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो ह्रदय में बास । मनोकामना सिद्ध करि, पुरवहु मेरी आस ।। सोरठा यही मोर
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान । कहत अयोध्यादास तुम, देउ अभय वरदान ।। जय गिरिजापति दीनदयाला । सदा
दोहा श्री गुरु चरन सरोज रज, निज मन मुकुरु सुधारी । बरनउं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि ।।
यदि सुबह सुवेरे नियमित रुप से गणेश चालीसा का पाठ किया जाए तो घर में खुशहाली रहती है. घर-परिवार में
भारतीय ज्योतिष में नामकरण संस्कार को सोलह संस्कारों में से एक संस्कार के रुप में महत्ता प्राप्त है. व्यक्ति के
भारतीय संस्कृति में मंत्र जाप की परंपरा पुरातन काल से ही चली आ रही है. मंत्र के जाप द्वारा आत्मा,