श्री गायत्री चालीसा
ह्रीं श्रीं क्लीं मेधा प्रभा जीवन ज्योति प्रचण्ड । शान्ति कान्ति जागृत प्रगति रचना शक्ति अखण्ड ॥ जगत जननी मङ्गल
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ह्रीं श्रीं क्लीं मेधा प्रभा जीवन ज्योति प्रचण्ड । शान्ति कान्ति जागृत प्रगति रचना शक्ति अखण्ड ॥ जगत जननी मङ्गल
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ।। जय…….. एक दंत दयावंत, चार भुजा
जो व्यक्ति वास्तव मे ज्योतिष के विषय की पारखी नजर रखता है वो महर्षि पराशर के नाम से अवश्य परिचित
दोहा जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल। दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥ जय जय श्री
नमो नमो दुर्गे सुख करनी । नमो नमो अंबे दुख हरनी ।। निरंकार है ज्योति तुम्हारी । तिहूं लोक फैली
ऊँकारं विन्दुसंयुक्तं नित्यं ध्यायन्ति योगिन: । कामदं मोक्षदं चैव ऊँकाराय नमो नम: ।।1।। नमन्ति ऋषयो देवा नमन्त्यप्सरसां गणा: । नरा