श्रीराम स्तुति
श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभव दारुणं । नवकंज-लोचन, कंजमुख, कर-कंज, पद कंजारुणं ।। कंदर्प अगणित अमित छबि, नवनील-नीरद-सुंदरं ।
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श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभव दारुणं । नवकंज-लोचन, कंजमुख, कर-कंज, पद कंजारुणं ।। कंदर्प अगणित अमित छबि, नवनील-नीरद-सुंदरं ।
त्वं देवी जगतां माता विष्णुमाया सनातनी कृष्ण प्राणाधिदेवी च कृष्ण प्राणाधिका शुभा कृष्ण भक्तिं कृष्ण दास्यं देहि मे कृष्ण पूजिते
जय भगवति देवि नमो वरदे, जय पापविनाशिनि बहुफलदे । जय शुम्भ-निशुम्भ-कपालधरे, प्रणमामि तु देवि नरार्तिहरे ।।1।। जय चन्द्रदिवाकर नेत्रधरे, जय
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रान्विता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना । या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवै: सदा वन्दिता सा मां पातु सरस्वती भगवती नि:शेषजाड्यापहा ।।1।।
अंग हरे: पुलकभूषणमाश्रयन्ती भृंगांगनेव मुकुलाभरणं तमालम । अंगीकृताखिल विभूतिरपांगलीला मांगल्यदाsस्तु मम मंगलदेवताया: ।।1।। मुग्धा मुहुर्विदधती वदने मुरारे: प्रेमत्रपाप्रणिहितानि गतागतानि ।
यह श्री सूक्तं ऋग्वेद से लिया गया है. ऊँ हिरण्यवर्णा हरिणीं सुवर्णरजतस्त्रजाम । हिरण्मयीं लक्ष्मीं जात्वेदो म आ वह