श्रीदेव्या: प्रात:स्मरणम्
प्रात: स्मरामि शरदिन्दुकरोज्ज्वलाभां सद्रत्नवन्मकरकुण्डलहारभूषाम् । दिव्यायुधोर्जितसुनीलसहस्त्रहस्तां रक्तोत्पलाभचरणां भवतीं परेशाम् ।।1।। हिन्दी अनुवाद : जिनकी अंगकान्ति शारदीय चन्द्रमा की किरण के
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प्रात: स्मरामि शरदिन्दुकरोज्ज्वलाभां सद्रत्नवन्मकरकुण्डलहारभूषाम् । दिव्यायुधोर्जितसुनीलसहस्त्रहस्तां रक्तोत्पलाभचरणां भवतीं परेशाम् ।।1।। हिन्दी अनुवाद : जिनकी अंगकान्ति शारदीय चन्द्रमा की किरण के
श्री सत्यनारायण भगवान की कथा का पीडीएफ डाउनलोड करें :- श्री सत्यनारायण भगवान की कथा पहला अध्याय – First Chapter
शनिवार का व्रत शनि महाराज को प्रसन्न करने के लिए रखा जाता है. जिनकी जन्म कुंडली में शनि की साढ़ेसाती
शुक्रवार के व्रत में कथा कहते हुए अथवा कथा सुनते हुए हाथ में थोड़ा गुड़ व भुना हुआ चना रखते
बृहस्पतिवार के दिन बृहस्पतिश्वर देव की पूजा व व्रत किया जाता है. स्नानादि से निवृत होकर सुबह पीले रंग के
सभी प्रकार के सुखों को पाने, रक्त विकार से मुक्ति, सरकारी सम्मान पाने के लिए और पुत्र की प्राप्ति के