श्रीदेव्या: प्रात:स्मरणम्
प्रात: स्मरामि शरदिन्दुकरोज्ज्वलाभां सद्रत्नवन्मकरकुण्डलहारभूषाम् । दिव्यायुधोर्जितसुनीलसहस्त्रहस्तां रक्तोत्पलाभचरणां भवतीं परेशाम् ।।1।। हिन्दी अनुवाद : जिनकी अंगकान्ति शारदीय चन्द्रमा की किरण के
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प्रात: स्मरामि शरदिन्दुकरोज्ज्वलाभां सद्रत्नवन्मकरकुण्डलहारभूषाम् । दिव्यायुधोर्जितसुनीलसहस्त्रहस्तां रक्तोत्पलाभचरणां भवतीं परेशाम् ।।1।। हिन्दी अनुवाद : जिनकी अंगकान्ति शारदीय चन्द्रमा की किरण के
प्रात: स्मरामि गणनाथमनाथबन्धुं सिन्दूरपूरपरिशोभितगण्डयुग्मम् । उद्दण्डविघ्नपरिखण्डनचण्डदण्ड – माखण्डलादिसुरनायकवृन्दवन्द्यम् ।।1।। हिन्दी अनुवाद : जो इन्द्र आदि देवेश्वरों के समूह से वन्दनीय
शनिवार का व्रत शनि महाराज को प्रसन्न करने के लिए रखा जाता है. जिनकी जन्म कुंडली में शनि की साढ़ेसाती
शुक्रवार के व्रत में कथा कहते हुए अथवा कथा सुनते हुए हाथ में थोड़ा गुड़ व भुना हुआ चना रखते
हर व्यक्ति को कभी ना कभी समस्याओं से होकर गुजरना ही पड़ता है और कई बार समस्याएँ इतनी गंभीर हो
आधुनिक समय में इस भाग दौड़ और चमक की दुनिया में हर कोई व्यक्ति अमीर बनना चाहता है. इसके लिए