षष्ठी देवी स्तोत्र
षष्ठी देवी पूजा महत्व भगवती षष्ठी देवी शिशुओं की अधिष्ठात्री देवी हैं. जिन्हें संतान नहीं होती, उन्हें यह संतान देती
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षष्ठी देवी पूजा महत्व भगवती षष्ठी देवी शिशुओं की अधिष्ठात्री देवी हैं. जिन्हें संतान नहीं होती, उन्हें यह संतान देती
सुमुखश्चैकदन्तश्च कपिलो गजकर्णक: । लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो विनायक: ।।1।। धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजानन: । द्वादशैतानि नामानि य: पठेच्छृणुयादपि ।।2।। विद्यारम्भे विवाहे
भगवान गणेश – Lord Ganesha सिन्दूरवर्णं द्विभुजं गणेशं लम्बोदरं पद्मदले निविष्टम । ब्रह्मादिदेवै: परिसेव्यमानं सिद्धैर्युतं तं प्रणमामि देवम ।।
महेश्वर उवाच जयस्व देवि गायत्रि महामाये महाप्रभे । महादेवि महाभागे महासत्त्वे महोत्सवे ।।1।। दिव्यगन्धानुलिप्ताड़्गि दिव्यस्त्रग्दामभूषिते । वेदमातर्नमस्तुभ्यं त्र्यक्षरस्थे महेश्वरि ।।2।।
स्वामिपुष्करिणीतीर्थं पूर्वसिन्धुः पिनाकिनी। शिलाह्रदश्चतुर्मध्यं यावत् तुण्डीरमण्डलम् ।।1।। मध्ये तुण्डीरभूवृत्तं कम्पा-वेगवती-द्वयोः। तयोर्मध्यं कामकोष्ठं कामाक्षी तत्र वर्तते ।।2।। स एव
हर ग्रह का अपना एक मंत्र हैं और मंत्रों का जाप कितनी संख्या में करना चाहिए यह भी हर ग्रह