संकष्टनामाष्टकम्

नारद उवाच – Narad Uvach जैगीषव्य मुनिश्रेष्ठ सर्वज्ञ सुखदायक। आख्यातानि सुपुण्यानि श्रुतानि त्वत्प्रसादत:।।1।।   न तृप्तिमधिगच्छामि तव वागमृतेन च। वदस्वैकं

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आरती श्री सरस्वती जी

जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता। सद्गुण, वैभवशालिनि, त्रिभुवन विख्याता ।।जय।।   चन्द्रवदनि, पद्मासिनि द्युति मंगलकारी। सोहे हंस-सवारी, अतुल

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कात्यायनी स्तुति:

नमस्ते   त्रिजगद्वन्द्ये   संग्रामे    जयदायिनि। प्रसीद   विजयं   देहि   कात्यायनि  नमोSस्तु ते ।।1।।   सर्वशक्तिमये दुष्टरिपुनिग्रहकारिणि। दुष्टजृम्भिणि   संग्रामे   जयं   देहि  नमोSस्तु ते।।2।।

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गंगा दशहरा स्तोत्रम्

ऊँ  नम:  शिवायै  गंगायै  शिवदायै  नमो नम:। नमस्ते विष्णुरूपिण्यै ब्रह्ममूर्त्यै नमोSस्तु ते।।1।। नमस्ते   रुद्ररूपिण्यै   शांकर्यै   ते  नमो  नम:। सर्वदेवस्वरूपिण्यै      नमो

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