पुरुषोत्तम सहस्त्रनाम स्तोत्रम्
इस स्तोत्र की विशेषता यह है कि इसमें वेदरूपी कल्पवृक्ष के परिपक्व फल “निगमकल्पतरोर्गलितं फलं” अर्थात श्रीमद्भागवतमहापुराण के प्रथम स्कन्ध
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इस स्तोत्र की विशेषता यह है कि इसमें वेदरूपी कल्पवृक्ष के परिपक्व फल “निगमकल्पतरोर्गलितं फलं” अर्थात श्रीमद्भागवतमहापुराण के प्रथम स्कन्ध
1) ऊँ नमो भगवते श्रीकृष्णाय नम: । 2) ऊँ नमो भगवते सच्चिदानन्दाय नम: । 3) ऊँ नमो भगवते नित्यलीलाविनोदकृते नम:
श्रावण मास माहात्म्य के पाठ एवं श्रवण का फल ईश्वर बोले – हे सनत्कुमार ! मैंने आपसे श्रावण मास का
श्रावण मास में किये जाने वाले व्रतों का कालनिर्णय ईश्वर बोले – हे सनत्कुमार ! अब मैं पूर्व में कहे
अगस्त्य जी को अर्घ्य प्रदान की विधि ईश्वर बोले – हे ब्रह्मपुत्र ! अब मैं अगस्त्य जी को अर्घ्य प्रदान
कर्क संक्रांति और सिंह संक्रांति में किए जाने वाले कार्य ईश्वर बोले – हे सनत्कुमार ! श्रावण मास में कर्क