श्रीललिताष्टोत्तरशतनामावलि:
ऊँ ऎं हृीं श्रीं 1) ऊँ ऎँ हृीं श्रीं रजताचलश्रृंगाग्रममध्यस्थायै नमो नम: 2) ऊँ ऎँ हृीं श्रीं हिमाचलमहावंशपावनायै नमो नम:
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ऊँ ऎं हृीं श्रीं 1) ऊँ ऎँ हृीं श्रीं रजताचलश्रृंगाग्रममध्यस्थायै नमो नम: 2) ऊँ ऎँ हृीं श्रीं हिमाचलमहावंशपावनायै नमो नम:
श्री रघुवीर भक्त हितकारी । सुन लीजै प्रभु अरज हमारी ।। निशि दिन ध्यान धरै जो कोई । ता सम
श्री पार्वती चालीसा ।।दोहा।। जय गिरि तनये दक्षजे शंभु प्रिये गुणखानि । गणपति जननी पार्वती अम्बे ! शक्ति ! भवानि
श्री संतोषी माँ चालीसा ।।दोहा।। श्री गणपति पद नाय सिर, धरि हिय शारदा ध्यान । संतोषी माँ की करूं, कीरति
।।दोहा।। जय-जय माता शीतला, तुमहिं धरै जो ध्यान । होय विमल शीतल हृदय, विकसै बुद्धि बलज्ञान ।। घट-घट वासी शीतला,
अस्य श्रीललितात्रिशतीस्तोत्रमालामन्त्रस्य हयग्रीवऋषये नम: । (शिरसि) अनुष्टुपछन्द से नम: । (मुखे), श्रीललिताम्बादेवतायै नम: । हृदये, क. 5 बीजाय नम: ।