पाप-प्रशमन स्तोत्र का महत्व

कई बार जाने-अनजाने मनुष्य से पाप हो जाता है अथवा होता रहता है. भूलवश अथवा जानकर किए गए पाप से

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मार्कण्डेय प्रोक्त मृत्युशमन “महामृत्युंजय स्तोत्र”

मार्कण्डेय मुनि द्वारा वर्णित “महामृत्युंजय स्तोत्र” मृत्युंजय पंचांग में प्रसिद्ध है और यह मृत्यु के भय को मिटाने वाला स्तोत्र

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श्रीदेव्या: प्रात:स्मरणम्

प्रात: स्मरामि शरदिन्दुकरोज्ज्वलाभां सद्रत्नवन्मकरकुण्डलहारभूषाम् । दिव्यायुधोर्जितसुनीलसहस्त्रहस्तां रक्तोत्पलाभचरणां भवतीं परेशाम् ।।1।। हिन्दी अनुवाद : जिनकी अंगकान्ति शारदीय चन्द्रमा की किरण के

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