पाप-प्रशमन स्तोत्र का महत्व
कई बार जाने-अनजाने मनुष्य से पाप हो जाता है अथवा होता रहता है. भूलवश अथवा जानकर किए गए पाप से
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कई बार जाने-अनजाने मनुष्य से पाप हो जाता है अथवा होता रहता है. भूलवश अथवा जानकर किए गए पाप से
मार्कण्डेय मुनि द्वारा वर्णित “महामृत्युंजय स्तोत्र” मृत्युंजय पंचांग में प्रसिद्ध है और यह मृत्यु के भय को मिटाने वाला स्तोत्र
शनि की ढैय्या तथा साढ़ेसाती से मिलने वाले कष्टों को दूर करने के बहुत से उपाय हैं जिनमें से कुछ
लक्ष्मी प्राप्ति के उपाय वर्तमान समय में धन के बिना कुछ संभव नहीं है. अगर धन नहीं है तो जीवन
जीवन में कई बार समस्याओं का सामना कभी ना कभी हर व्यक्ति को करना पड़ता है. समस्याएँ तो जीवन में
प्रात: स्मरामि शरदिन्दुकरोज्ज्वलाभां सद्रत्नवन्मकरकुण्डलहारभूषाम् । दिव्यायुधोर्जितसुनीलसहस्त्रहस्तां रक्तोत्पलाभचरणां भवतीं परेशाम् ।।1।। हिन्दी अनुवाद : जिनकी अंगकान्ति शारदीय चन्द्रमा की किरण के