श्री दुर्गा सप्तशती पाठ
ऊँ नमश्चण्डिकायै नम: अथ श्री दुर्गा सप्तशती भाषा पहला अध्याय – Chapter First – Durga Saptashati (महर्षि ऋषि का राजा
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ऊँ नमश्चण्डिकायै नम: अथ श्री दुर्गा सप्तशती भाषा पहला अध्याय – Chapter First – Durga Saptashati (महर्षि ऋषि का राजा
दोहा – नमो नमो विन्ध्येश्वरी, नमो नमो जगदम्ब । सन्तजनों के काज में, करती नहीं विलम्ब ।। जय जय जय
संवत 1664 विक्रमाब्द के लगभग गोस्वामी तुलसीदास जी की बाहुओं में वात व्याधि की गहरी पीड़ा उत्पन्न हुई. फोड़े-फुंसियों
अंगं हरे: पुलकभूषणमाश्रयन्ती भृंगांगनेव मुकुलाभरणं तमालम् अंगीकृताखिलविभूतिरपांगलीला मांगल्यदास्तु मम मंगलदेवताया: ।।1।। मुग्धा मुहुर्विदधती वदने मुरारे: प्रेमत्रपाप्रणिहितानि गतागतानि । माला
मुदा करात्तमोदकं सदा विमुक्तिसाधकं कलाधरावतंकसकं विलासिलोकरंजकम् अनायकैकनायकं नमामि तं विनायम् नताशुभाशुनाशकं नमामि तं विनायम् नतेतरातिभीकरं नवोदितार्कभास्वरं नमत्सुरारिनिर्जरं नताधिकापदुद्धरम्
महर्षि श्री मार्कडेयजी बोले – निर्मल ज्ञानरूपी शरीर धारण करने वाले, देवत्रयी रूप दिव्य तीन नेत्र वाले, जो कल्याण प्राप्ति