आरती श्री जानकी जी
आरती श्रीजनक दुलारी की। सीताजी रघुबर प्यारी की – टेक जगत-जननि जग की विस्तारिणि, नित्य सत्य साकेत-विहारिणि, परम दयामयि
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आरती श्रीजनक दुलारी की। सीताजी रघुबर प्यारी की – टेक जगत-जननि जग की विस्तारिणि, नित्य सत्य साकेत-विहारिणि, परम दयामयि
नमस्ते त्रिजगद्वन्द्ये संग्रामे जयदायिनि। प्रसीद विजयं देहि कात्यायनि नमोSस्तु ते ।।1।। सर्वशक्तिमये दुष्टरिपुनिग्रहकारिणि। दुष्टजृम्भिणि संग्रामे जयं देहि नमोSस्तु ते।।2।।
ऊँ नम: शिवायै गंगायै शिवदायै नमो नम:। नमस्ते विष्णुरूपिण्यै ब्रह्ममूर्त्यै नमोSस्तु ते।।1।। नमस्ते रुद्ररूपिण्यै शांकर्यै ते नमो नम:। सर्वदेवस्वरूपिण्यै नमो
जो भी व्यक्ति श्रद्धा तथा विश्वास के साथ नियमित रुप से 9 दिन तक इस स्तोत्र का जाप करता है
(Kali Stotram For Success) ब्रह्मविष्णु ऊचतु: – Brahmavishnu Uchatuh नमामि त्वां विश्वकर्त्रीं परेशीं नित्यामाद्यां सत्यविज्ञानरूपाम्। वाचातीतां निर्गुणां चातिसूक्ष्मां ज्ञानातीतां शुद्धविज्ञानगम्याम्।।1।।
भगवती दुर्गा – Bhagawati Durga विद्युतद्दामसमप्रभां मृगपतिस्कन्धस्थितां भीषणां कन्याभि: करवालखेटविलसद्धस्ताभिरासेविताम्। हस्तैश्चक्रगदासिखेटविशिखांश्चापं गुणं तर्जनीं बिभ्राणामनलात्मिकां शशिधरां दुर्गां त्रिनेत्रां भजे।। अर्थ –