महाभागवत – देवीपुराण – पहला अध्याय
श्रीगणेश जी को नमस्कार है।। श्रीगणेश जी के चरण कमल के परागकण, जो देवेन्द्र के मस्तक पर विराजमान मन्दार-पुष्प के
Astrology, Mantra and Dharma
श्रीगणेश जी को नमस्कार है।। श्रीगणेश जी के चरण कमल के परागकण, जो देवेन्द्र के मस्तक पर विराजमान मन्दार-पुष्प के
ऊँ अस्य श्रीसप्तशतीरहस्यत्रस्य नारायण ऋषिरनुष्टुप्छन्द:, महाकालीमहालक्ष्मीमहासरस्वत्यो देवता यथोक्तफलावाप्तयर्थं जपे विनियोग: । अर्थ – ऊँ सप्तशती के इन तीनों रहस्यों के
इन्द्र उवाच ऊँ नम: कमलवासिन्यै नारायण्यै नमो नम: । कृष्णप्रियायै सारायै पद्मायै च नमो नम: ।।1।। अर्थ – देवराज इन्द्र
अमोघ शिवकवच परम हितकारी है और सारे डरों को दूर करने वाला है. इसके प्रभाव से मृत्यु के नजदीक पहुँचा
प्रारंभ काल (Starting Time)
सकुंकुमविलेपनामलिकचुम्बिकस्तूरिकां समन्दहसितेक्षणां सशरचापपाशांकुशाम् । अशेषजनमोहिनीमरुणमाल्यभूषाम्बरां जपाकुसुमभासुरां जपविधौ स्मरेदम्बिकाम् ।। अगस्त्य उवाच हयग्रीव दयासिन्धो भगवन् भक्तवत्सल । त्वत्त: श्रुतमशेषेण श्रोतव्यं