अथ वैकृतिकं रहस्यम्
ऋषि रुवाच ऊँ त्रिगुणा तामसी देवी सात्त्विकी या त्रिधोदिता । सा शर्वा चण्डिका दुर्गा भद्रा भगवतीर्यते ।।1।। अर्थ – ऋषि
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ऋषि रुवाच ऊँ त्रिगुणा तामसी देवी सात्त्विकी या त्रिधोदिता । सा शर्वा चण्डिका दुर्गा भद्रा भगवतीर्यते ।।1।। अर्थ – ऋषि
तिथियाँ (Dates) दिन (Days) हिन्दु माह (Hindu Month) 6 जनवरी बुधवार पौष मास कालाष्टमी व्रत 4 फरवरी बृहस्पतिवार माघ मास
देवी की अंगभूता छ्: देवियाँ हैं – नन्दा, रक्तदन्तिका, शाकम्भरी, दुर्गा, भीमा और भ्रामरी. ये देवियों की साक्षात मूर्तियाँ हैं,
उद्यच्चन्दनकुंकुमारुणपयोधाराभिराप्लावितां नानानर्घ्यमणिप्रवालघटितां दत्तां गृहाणाम्बिके । आमृष्टां सुरसुन्दरीभिरभितो हस्ताम्बुजैर्भक्तितो मात: सुन्दरि भक्तकल्पलतिके श्रीपादुकामादरात् ।।1।। अर्थ – माता त्रिपुरसुन्दरि ! तुम
ऊँ रात्रीत्याद्यष्टर्चस्य सूक्तस्य कुशिक: सौभरो रात्रिर्वा भारद्वाजो ऋषि:, रात्रिर्देवता, गायत्री छन्द:, देवीमाहात्म्यपाठे विनियोग: । ऊँ रात्री व्यख्यदायती पुरुत्रा देव्यक्षभि: ।
ऊँ अस्य श्रीकीलकमन्त्रस्य शिव ऋषि:, अनुष्टुप् छन्द:, श्रीमहासरस्वती देवता, श्रीजगदम्बाप्रीत्यर्थं सप्तशतीपाठांगत्वेन जपे विनियोग: । ऊँ नमश्चण्डिकायै ।। मार्कण्डेय