शनि दशा के फल 

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शनि की दशा का सामान्य फल कहा गया है कि इस दशा में बकरा, ऊँट, गधा, पक्षी, वृद्ध महिला, धन व नीचकुल के अधिपत्य का लाभ होता है. इस दशा में मनुष्यों के द्वारा ही व्यक्ति आतंक व दारिद्रय के कष्ट से दु:खी रहता है. बुद्धि का नाश हो जाता है तथा गोपनीय आचरण से मर्माहत हो जाता है. दुष्ट व्यक्तियों के द्वारा इसके धन का नाश हो जाता है. घर-परिवार में किसी ना किसी को रोग घेरे रहता है जिससे व्यक्ति का मन सदा खिन्न रहता है. मित्रादि शत्रु बन जाते हैं, कुल में विवाद रहता है और व्यक्ति की दीन अवस्था रहती है. इस दशा में विदेश यात्रा होती है, धन तथा कुल की हानि भी देखी गई है. विपदा किसी ना किसी रुप में आती रहती है. मन व्याकुल रहता है और अशुभ फल मिलने की संभावना ज्यादा रहती है. 

शनि के निर्बल होने पर इस दशा में व्यक्ति निद्रा, आलस्य, कफ, वायु तथा पित्त संबंधी रोगों से परेशान रह सकता है. दाद, खुजली तथा हैजा जैसे रोगों से ग्रस्त हो सकता है. इस दशा में व्यक्ति किसी वृद्धा की इच्छा मन में रख सकता है. 

अगर शनि शुभ अवस्था में जन्म कुंडली में स्थित है तब व्यक्ति प्रतापी होता है, लक्ष्मी संपन्न होता है, ग्रामादि का अधिपति होता है, देवताओं व ब्राह्मणों में आस्था रहती है. व्यक्ति स्वर्ण, वस्त्र, हाथी-घोड़ों से सुखी रहता है. व्यक्ति काव्य कला जैसे क्रिया-कलापों में अत्यधिक निपुण होता है. इस दशा में जातक सुशील तथा कीर्तिवान होता है. जीवन में जो प्राप्तियाँ पहले से मिली हुई हैं, इस दशा में उनसे और सुखी होता है. इस दशा में जातक अपने कुल में श्रेष्ठ रहता है, व्यक्ति अत्यधिक विनम्र होता है, देवताओं तथा ब्राह्मणों की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहता है. 

शनि की दशा में व्यक्ति बुद्धिमान, दानी, सुशील और अनेकों कौशल से युक्त होता है. देवताओं तथा ब्राह्मणों के लिए गृह आदि का निर्माण भी व्यक्ति इस दशा में करवाता है. 

 

परमोच्च शनि का दशा फल 

यदि जन्म कुंडली में शनि अपनी अति उच्च राशि में स्थित है तब इसकी दशा में व्यक्ति किसी ग्राम अथवा सभा मण्डल का आधिपत्य प्राप्त करता है. व्यक्ति सुशील तो होता ही है साथ ही विनोदप्रिय भी होता है लेकिन इस दशा में व्यक्ति के पिता का निधन होता है और स्वजनों के साथ क्लेश रहता है. 

 

उच्च शनि का दशा फल 

यदि जन्म कुंडली में शनि अपनी उच्च राशि में स्थित है तब व्यक्ति इसकी दशा में अपने देश का त्याग करता है. व्यक्ति को मानसिक रोग अथवा कष्ट होते हैं. यह कष्ट किसी भी रुप में व्यक्ति को भुगतने पड़ सकते हैं. व्यक्ति के व्यवसाय की हानि होती है. इस दशा में कृषि की भी हानि होती है और सरकार अथवा सरकारी अधिकारियों से विरोध रहता है. 

 

मूलत्रिकोण शनि का दशाफल 

यदि जन्म कुंडली में शनि अपनी मूल त्रिकोण राशि में स्थित है तब इसकी दशा में व्यक्ति देश में इधर-उधर घूमने वाला होता है. व्यक्ति वन में निवास करने वाला होता है. दो नामधारी होता है, किसी सभा और नगर का अधिपति भी हो सकता है. व्यक्ति का अपनी स्त्री व पुत्र से विरोध भी हो सकता है. 

 

स्वराशि शनि का दशाफल 

यदि जन्म कुंडली में शनि अपनी ही राशि मकर या कुंभ में स्थित है तब इसकी दशा में व्यक्ति के बल, पुरुषत्व तथा कीर्ति में वृद्धि होती है. व्यक्ति सरकार का आश्रय प्राप्त करता है. इस दशा में व्यक्ति स्वर्ण, आभूषण, भूमि आदि पाता है. धैर्यवान होता है, अपने नाम के अनुकूल गुण संपन्न और सुखी होता है. 

 

अतिमित्र और मित्र राशि में शनि का दशाफल 

यदि जन्म कुंडली में शनि अपनी अतिमित्र राशि में स्थित है तब इसकी दशा में व्यक्ति सरकार से सम्मान पाता है. पुत्र-स्त्री व धन आदि से सुखी होता है. पशु, भैंस, कृषि संबंधी चीजों का व्यापार करने वाला होता है. 

मित्र राशि में स्थित शनि की दशा में व्यक्ति शिल्प के कार्यों में निपुण होता है. अपने ज्ञान बल से युक्त होकर प्रतापी होता है लेकिन इसकी दशा में व्यक्ति दु:खी रहता है. 

 

सम राशि में शनि का दशाफल 

यदि जन्म कुंडली में शनि अपनी सम राशि में स्थित हो तब इसकी दशा में व्यक्ति सभी से एक समान व्यवहार करता है चाहे वह घर वाले हों अथवा बाहर वाले लोग हों. इस दशा में व्यक्ति को अपने नौकरों की ओर से संकट का सामना करना पड़ सकता है. अपने बंधु-बांधवों से वैर भी इसी दशा में होता है. वात-पित्त संबंधी विकारों से शारीरिक कष्ट होता है. इस दशा में व्यक्ति को कोई ना कोई क्षति भी होती है. 

 

आरोहिणी शनि का दशाफल 

जन्म कुंडली में यदि शनि आरोहिणी अवस्था (नीच और उच्च राशि के मध्य स्थित है) में स्थित है तब इसकी दशा में व्यक्ति का भाग्योदय सरकारी सहयोग के द्वारा होता है. इस दशा में व्यक्ति को वाणिज्य, कृषि, भूमि, हाथी, घोड़े, वाहन तथा स्त्री-पुत्रों का लाभ होता है. 

 

अवरोहिणी शनि का दशाफल 

जन्म कुंडली में शनि यदि अवरोहिणी अवस्था (उच्च और नीच राशि के मध्य स्थित है) में स्थित है तब इस दशा में सरकार की नाराजगी हो सकती है जिसके कारण स्थान परिवर्तन करना पड़ सकता है. धन की हानि उठानी पड़ सकती है और स्त्री-पुत्रों से भी हानि उठानी पड़ सकती है. भाग्य साथ नहीं देता है और सरकार की ओर से डर लगा रहता है. इस दशा में व्यक्ति को दासता भी झेलनी पड़ सकती है. गुदा तथा आँखों के रोग से व्यक्ति कष्ट उठाता है.  

 

शत्रु तथा अतिशत्रु राशि में शनि का दशाफल 

यदि जन्म कुंडली में शनि अपनी शत्रु राशि में स्थित है तब इसकी दशा में व्यक्ति वेश्याओं से धन प्राप्त करता है. इस दशा में व्यक्ति की भूमि का नाश हो जाता है. खेती-बाड़ी की हानि होती है, व्यक्ति अपने पद से हट जाता है. इस दशा में व्यक्ति शारीरिक दुर्बलता पाता है और लोगों से शत्रुता होती है.  

 

यदि जन्म कुंडली में शनि अतिशत्रु राशि में स्थित है तब इसकी दशा में व्यक्ति की स्थानच्युति होती है अर्थात व्यक्ति अपने स्थान से हट जाता है. बन्धुओं से विरोध होता है, चोर तथा अग्नि से भय रहता है. सरकार अथवा सरकारी कर्मचारियों की ओर से भी भय बना रहता है और इनकी ओर से बाधाएँ उत्पन्न होती रहती है. शनि की इस दशा में नौकर व्यक्ति से नाराज रहते हैं और स्त्री व संतान भी नाराज रहती है. 

 

नीच राशि में शनि का दशाफल 

जन्म कुंडली में यदि शनि अपनी नीच राशि में स्थित है तब इसकी दशा में व्यक्ति को स्त्री-पुत्रादि से हानि होती है, भाई-बन्धुओं की हानि होती है और बहुत बड़े कष्ट उठाकर अथवा नीचवृत्ति से व्यक्ति अपना जीवनयापन करता है. 

 

उच्च ग्रह से युक्त शनि का दशाफल 

जन्म कुंडली में यदि शनि किसी उच्च के ग्रह के साथ स्थित है तब इसकी दशा में व्यक्ति को बहुत-से सुखों की प्राप्ति होती है. थोड़ा-सा राज्य सुख भी मिल जाता है. कृषि संबंधी वस्तुओं का लाभ व्यक्ति को इस दशा में मिलता है. इस दशा में सेवाकर्मियों का नाश होता है. 

 

नीच ग्रह से युक्त शनि का दशाफल 

जन्म कुंडली में शनि यदि किसी नीच ग्रह के साथ स्थित है तब इसकी दशा में व्यक्ति को बहुत ज्यादा कष्ट तथा भय सताते रहते हैं. व्यक्ति छल-कपट करने वाला होता है और कई बार व्यक्ति की आर्थिक स्थिति इतनी बदतर हो जाती है कि व्यक्ति के फाके मारने अथवा उपवास की स्थिति पैदा हो जाती है. इस दशा में व्यक्ति निम्न वृत्ति के द्वारा अपना जीवनयापन करता है. 

 

शुभ ग्रह से युक्त शनि का दशाफल 

जन्म कुंडली में शनि यदि किसी शुभ ग्रह के साथ स्थित है तब इसकी दशा में व्यक्ति किसी विशेष ज्ञान में वृद्धि करता है. व्यक्ति परोपकार के काम करता है, सरकार की ओर से उसके भाग्य में वृद्धि होती है जिससे भाग्य से सुख पाता है. इस दशा में व्यक्ति काले वर्ण की वस्तुओं के धान्य से लाभ पाता है और यदि व्यक्ति लोहे का काम करता है तब उससे भी लाभ पाता है. 

 

अशुभ या पाप ग्रह से युक्त शनि का दशाफल 

जन्म कुंडली में यदि शनि किसी पापी अथवा अशुभ ग्रह के साथ स्थित है तब इसकी दशा में व्यक्ति अत्यधिक पापकर्म करने वाला होता है. इस दशा में व्यक्ति नीच स्त्रियों की संगति में रहने वाला होता है. इस दशा में व्यक्ति चोरों तथा निम्न स्तर के लोगों से विवाद रहता है और स्त्री के बिना ही इसे रहना पड़ता है. 

 

शुभ ग्रह से दृष्ट शनि का दशाफल 

जन्म कुंडली में शनि यदि किसी शुभ ग्रह से दृष्ट है तब इसकी दशा में व्यक्ति के धन में वृद्धि होती है, स्त्री, संतान तथा नौकर-चाकरों की वृद्धि होती है लेकिन बाद में अत्यधिक कष्ट होता है. गाय, भूमि, व्यवसाय तथा कृषि का नाश होता है. 

 

अशुभ या पाप ग्रह से दृष्ट शनि का दशाफल 

जन्म कुंडली में यदि शनि पाप अथवा अशुभ ग्रह से दृष्ट है तब इसकी दशा में धन, स्त्री, पुत्रादि का नाश होता है. भाईयों तथा सेवकों का भी इस दशा में नाश होता है. इस दशा में व्यक्ति का किसी न किसी से विवाद चलता रहता है. इस दशा में व्यक्ति कुभोजन प्राप्त करता है तथा खराब गंध आदि प्राप्त होते हैं.