खण्डग्रास चन्द्रग्रहण – 16/17 जुलाई 2019

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खण्डग्रास चन्द्रग्रहण आषाढ़ माह की पूर्णिमा को मंगलवार को 16/17 जुलाई की मध्यरात्रि में समस्त भारत में खण्डग्रास के रुप में दिखाई देगा. भारतीय समयानुसार जब मंगलवार की अर्धरात्रि में 1:31 पर यह ग्रहण शुरु होगा तब सारे भारत में चन्द्र उदय हो चुका होगा और 17 जुलाई की सुबह भारतीय समयानुसार ही 4:30 पर ग्रहण समाप्त होगा. समस्त भारत में इस ग्रहण का आरंभ, मध्य तथा मोक्ष देखा जा सकेगा लेकिन भारत के कुछ भागों जैसे अरुणाचल प्रदेश, आसाम, मेघालय, नागालैण्ड, मिजोरम, त्रिपुरा में ग्रहण समाप्त होने से पहले ही चन्द्र अस्त हो जाएगा. इन भागों में चन्द्र ग्रहण समाप्त होने से ¾ मिनट पहले ही चंद्र अस्त हो जाएगा. 

 

भारत के साथ अन्य क्षेत्रों जहां ग्रहण दिखाई देगा

भारत के अलावा पृथ्वी पर अन्य कुछ स्थानों पर भी यह ग्रहण दिखाई देगा. नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैण्ड, के उत्तरी भागों को छोड़कर, जापान को भी छोड़कर यह ग्रहण समस्त एशिया तथा दक्षिणी अमेरीका के ज्यादातर भागों में दिखाई देगा. इन भागों में इस ग्रहण का आरंभ, मध्य तथा समाप्ति काल देखा जा सकेगा. 

इनके अतिरिक्त पूर्वी आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैण्ड के कुछ पूर्वी भागों, दक्षिणी कोरिया, उत्तरी कोरिया, उत्तर-पूर्वी चीन तथा रुस के कुछ भागों में इस ग्रहण का प्रारंभ चन्द्र अस्त के समय देखा जाएगा.  

अर्जेण्टीना, चिल्ली, पश्चिमी ब्राजील, पेरु तथा बोल्विया में चन्द्र उदय के समय में इस ग्रहण की समाप्ति देखी जा सकेगी. 

 

ग्रहण का विवरण 

चन्द्र ग्रहण का जो विवरण यहाँ दिया जा रहा है वह भारतीय समयानुसार है. 

ग्रहण स्पर्श – रात्रि 01:31 बजे

ग्रहण मध्य – 03:01 बजे 

ग्रहण समाप्ति – सुबह 04:30 बजे 

ग्रहण की कुल अवधि 2 घंटे 59 मिनट रहेगी. इस ग्रहण में चन्द्र बिम्ब दक्षिण-पश्चिम की ओर से ग्रस्त दिखाई देगा. 

 

ग्रहण का सूतककाल तथा वर्जित कार्य

इस चन्द्र ग्रहण का सूतक 16 जुलाई को शाम 4 बजकर 31 मिनट पर ही शुरु हो जाएगा. सूतक का यह समय भारतीय समयानुसार है. सूतक के समय तथा ग्रहण के समय भगवान की मूर्त्ति स्पर्श करना, अनावश्यक खान-पान करना, रति क्रिया, सोना तथा तेल लगाना वर्जित माना गया है. झूठ बोलने से, छल-कपट से, व्यर्थ बात करने से, मूत्र करने से, नाखून आदि काटने से परहेज करना चाहिए. लेकिन वृद्ध तथा बीमार व्यक्ति, बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं को यथाउचित भोजन अथवा दवाई लेने में परहेज नहीं करना चाहिए. 

ग्रहण का सूतक आरंभ होने से पहले ही खाद्य पदार्थों के अंदर कुशा तोड़कर डाल देनी चाहिए और अगर कुशा ना हो तो तुलसी पत्ता ही डाल देना चाहिए. ऎसा करने से खाद्य पदार्थ ग्रहण की अवधि में दूषित नहीं होते हैं. जो सूखे खाद्य पदार्थ हैं उनमें कुशा डालने की आवश्यकता नहीं है लेकिन जो भोजन बना हुआ है या दही, दूध आदि तो घर में रहते ही हैं इनमें कुशा डालनी चाहिए. इसके अतिरिक्त यदि अचार, मुरब्बा, चटनी या इस तरह की बनी हुई कोई वस्तु है तब उनमें भी कुशा डालनी चाहिए. 

 

गर्भवती महिलाएँ ग्रहण समय में क्या ना करें

ग्रहण के समय गर्भवती महिलाओं को कोई भी कार्य ऎसा नहीं करना चाहिए जिससे उत्तेजना पैदा हो. इन्हें ग्रहण काल में सब्जी नहीं काटनी चाहिए अथवा कोई भी ऎसा काम जिसमें चाकू अथवा कैंची का उपयोग करना पड़े, नहीं करना चाहिए. सोना, पापड़ सेंकना आदि कार्य भी नहीं करने चाहिए. इन्हें ग्रहण के समय खुश रहना चाहिए और किसी धार्मिक ग्रंथ का पाठ करना चाहिए. 

 

ग्रहणकाल में करने योग्य कार्य 

ग्रहणकाल तथा सूतककाल में स्नान, दान तथा मंत्र जाप आदि का विधान बताया गया है. इस समय में मन्त्र जाप, स्तोत्र जाप, तीर्थ स्थानों पर स्नान, ध्यान, हवन आदि करना कल्याणकारी माना गया है. जो धर्म में आस्था रखते हैं उन्हें अपनी राशि अनुसार अन्न, जल, चावल, सफेद वस्त्र तथा दान योग्य वस्तुओं को एकत्रित कर ग्रहण के समय संकल्प करके अगले दिन सुबह सूर्योदय के समय पुन: स्नान करके किसी ब्राह्मण को देना चाहिए. 

 

ग्रहण के समय रोगी के लिए विशेष उपाय । Special Mantra For Sick During Chandra Grahan

यदि कोई व्यक्ति रोगग्रस्त है तब ग्रहण के समय “श्रीमहामृत्युजंय मंत्र” का जाप रोगी को रोग से मुक्ति दिला सकता है. एक दूसरा उपाय यह है कि ग्रहण के समय चाँदी अथवा काँसे की कटोरी में गाय का शुद्ध घी भरना चाहिए फिर उस घी की कटोरी में चाँदी का एक सिक्का मंत्र बोलकर डालना चाहिए और उसी समय उस घी के पात्र में अपना मुँह भी देखना चाहिए और छाया पात्र मंत्र पढ़ना चाहिए. चाँदी अथवा काँसे की इस कटोरी को काले तिलों के ऊपर रखना चाहिए. जब ग्रहण की समाप्ति हो जाए तब वस्त्र तथा फल दक्षिणा सहित ब्राह्मण को दान कर देना चाहिए और घी की कटोरी भी साथ ही दे देनी चाहिए. इससे जो भी रोग व्यक्ति को होगा उससे मुक्ति मिल जाएगी. छायापात्र मंत्र निम्नलिखित है :- 

छायापात्र मंत्र 

1) ऊँ आज्यं सुराणामाहारमाज्यं पापहरं परम् । आज्यमध्ये मुखं दृष्ट्वा सर्वपापै: प्रमुच्यते ।।

2) घृतं नाशयते व्याधिं घृतंच हरते रुजम् । घृतं तेजोधिकरंणं घृतमायु: प्रवर्द्धते ।।

उपरोक्त लिखित दोनो मंत्रों में से किसी एक मंत्र को बोलते हुए चाँदी का सिक्का काँसे के बर्तन में घी में डालते हुए बोलना है और साथ ही मुँह भी घी में देखना है. अगर रोगी चाहे तो दोनों मंत्रों को भी बारी-बारी से बोल सकता है. यदि बीमार व्यक्ति चलने में या खड़ा होने में असमर्थ है तब कोई दूसरा व्यक्ति कटोरी में घी भर सकता है और वही चाँदी का सिक्का भी मंत्र बोलते हुए डाल सकता है लेकिन कटोरी में मुँह रोगी को ही देखना है भले छायापात्र मंत्र कोई अन्य व्यक्ति बोल दे. 

छायापात्र मंत्र के बाद जब रोगी अपना मुँह देख ले तब अंत में रोगी या उसके साथ का कोई अन्य व्यक्ति एक प्रार्थना मंत्र और बोले जो इस प्रकार से है :- 

ऊँ यानि कानि च पापानि मया कामं कृतानि च । छायापात्रप्रदानेन तानि नश्यन्तु मे सदा ।। 

 

ग्रहण का फल 

यह चन्द्र ग्रहण मंगलवार के दिन तथा उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में लगेगा जिसके प्रभाव से अकाल का भय बना रहेगा. सच बोलने वाले व्यक्तियों को बुरे लोग पीड़ा पहुंचा सकते हैं. सुशील वर्ग के लोग, धनी लोग, किसान तथा बिल्डर्स को इस ग्रहण के प्रभाव से पीड़ा बनी रह सकती है. यह ग्रहण धनु व मकर राशि में घटित होगा जिससे पंजाब में उथल-पुथल देखी जा सकती है. व्यापारियों, मन्त्रियों, वैद्यों तथा दक्षिण प्रदेश के लोगों की तकलीफ बढ़ सकती है. 

 

राशियों पर ग्रहण का प्रभाव 

यह ग्रहण उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के प्रथम चरण में स्पर्श करेगा और इसी नक्षत्र के दूसरे चरण में ग्रहण समाप्त होगा. इसलिए धनु तथा मकर राशि के जातकों को ग्रहण की शान्ति का उपाय करना चाहिए. विशेषकर चन्द्र-राहु का दान तथा मंत्र जाप, धनु व मकर के राशि स्वामी गुरु व शनि का दान तथा मंत्र जाप करना होगा. 

मेष राशि के लिए यह ग्रहण रोग व शारीरिक कष्ट देने वाला होगा. वृष राशि वाले किसी बात से चिन्ताग्रस्त रहेगें तथा संतान की ओर से कष्ट होगा अथवा संतान को कष्ट होगा. मिथुन राशि को शत्रुओं का भय बना रहेगा तथा खर्च अधिक तो लाभ कम होगा. कर्क राशि के लोगों के दांपत्य जीवन में परेशानी उत्पन्न हो सकती है. सिंह राशि वालों को कोई रोग हो सकता है, गुप्त चिन्ताएँ सता सकती हैं तथा जीवन के संघर्षों में वृद्धि हो सकती है. कन्या राशि वालों के कार्य विलम्ब से बनेगें तथा आय से बहुत ज्यादा खर्चे होगें. 

तुला राशि वालों के लिए ग्रहण शुभ फल प्रदान करने वाला होगा. इनके कार्य सिद्ध होगें तथा लाभ की प्राप्ति होगी. वृश्चिक राशि वालों को धन लाभ होगा और साथ ही खर्चे भी ज्यादा हो सकते हैं या धन लाभ को आप फिजूल में उड़ा देगें. धनु राशि पर ग्रहण के प्रभाव से धन हानि होने की संभावना बनती है. चोटादि लग सकती है तथा व्यर्थ की यात्राएँ भी हो सकती हैं. मकर राशि वालों को शारीरिक कष्ट तथा चोट लगने की संभावना बनती है. कुंभ राशि वालों को धन की हानि उठानी पड़ सकती है तो इन्हें सचेत रहना चाहिए. मीन राशि वालों को धन का लाभ होगा तथा व्यक्ति उन्नति व तरक्की की राह पर आगे बढ़ेगा. 

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