कृत्तिका नक्षत्र का उपचार

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जन्म कुंडली में अगर जन्म नक्षत्र पीड़ित हो तो कार्तिकेय की पूजा करनी चाहिए या हनुमान जी की उपासना करनी चाहिए. कुछ विद्वानों का मानना है कि गायत्री मंत्र का जाप कर के भी कृत्तिका नक्षत्र के अशुभ प्रभाव को कम किया जा सकता है. इसके अलावा सूर्य स्तवन के द्वारा भी अच्छे फल पाए जा सकते हैं.

कुछ खास रंगों जैसे लाल, पीला, संतरी और केसरिया का उपयोग भी इस नक्षत्र के अशुभ प्रभाव को कम करता है. इस नक्षत्र के देव की मूर्ति की पूजा सफेद चंदन, धूप, दीप, खुश्बू, चमेली का फूल, तिल के तेल आदि से करने से भी शुभ फलों की वृद्धि होती है. इसके साथ ही कृत्तिका नक्षत्र के वैदिक मंत्र के जाप से भी इसके शुभ फलों में वृद्धि की जा सकती है. कृत्तिका नक्षत्र का वैदिक मंत्र है :-

अग्निर्मूर्धादिव: ककुत्पति: पृथित्या अयम् ।

अपागूं रेता गूं सिजिन्वति ऊँ अग्नये नम:।।

 

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