महाभागवत – देवी पुराण – इक्यासीवाँ अध्याय
महादेव जी बोले – वत्स ! भगवान् शंकर की पूजा का माहात्म्य मुझसे भक्तिभाव तथा ध्यानपूर्वक संक्षेप में सुनिए।।1।। कलियुग
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महादेव जी बोले – वत्स ! भगवान् शंकर की पूजा का माहात्म्य मुझसे भक्तिभाव तथा ध्यानपूर्वक संक्षेप में सुनिए।।1।। कलियुग
श्रीमहादेव जी बोले – मुनिश्रेष्ठ ! अब मैं रुद्राक्ष की महिमा तथा उसके परम पवित्र और गोपनीय आख्यान का संक्षेप
श्रीनारदजी बोले – परमेश्वर ! महान पातकों का नाश करने वाले योनिपीठ तीर्थ का माहात्म्य आप के मुखकमल से मैंने
श्रीमहादेव जी बोले – वहाँ भगवती कामाख्या के शक्तिपीठ में जो व्यक्ति वैशाख की तृतीया तिथि को भगवती चण्डिका की
श्रीनारदजी बोले – महेश्वर ! कामरूप महाक्षेत्र में दस महाविद्याओं की अधिष्ठात्री देवी महेश्वरी कौन है? उनके विषय में बताइये।।1।।
श्रीनारदजी बोले – प्रभो ! देव ! जगन्नाथ ! आपके मुखकमल से भगवती गङ्गा के अतुलनीय माहात्म्य को सुनकर मैं