संकष्टमोचन स्तोत्रम

सिन्दूरपूररुचिरो बलवीर्यसिन्धु – र्बुद्धिप्रवाहनिधिरद्भुतवैभवश्री: । दीनार्तिदावदहनो वरदो वरेण्य: संकष्टमोचनविभुस्तनुतां शुभं न: ।। सोत्साहलड़्घितमहार्णवपौरुषश्री – र्लड़्कापुरीप्रदहनप्रथितप्रभाव: । घोराहवप्रमथितारिचमूप्रवीर: प्राभंजनिर्जयति मर्कटसार्वभौम: ।।

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श्रीहनुमत्सहस्त्रनाम स्तोत्रम

हनुमान्श्रीप्रदो वायुपुत्रो रुद्रोsनघोsजर: । अमृत्युर्वीरवीरश्च ग्रामवासो जनाश्रय: ।।1।। धनदो निर्गुणोsकायो वीरो निधिपतिर्मुनि: । पिंड्गाक्षो वरदो वाग्मी सीताशोकविनाशन: ।।2।। शिव: सर्व:

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श्री राधा परिहार स्तोत्रम

त्वं देवी जगतां माता विष्णुमाया सनातनी कृष्ण प्राणाधिदेवी च कृष्ण प्राणाधिका शुभा कृष्ण भक्तिं कृष्ण दास्यं देहि मे कृष्ण पूजिते

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श्री भगवती स्तोत्रम

जय भगवति देवि नमो वरदे, जय पापविनाशिनि बहुफलदे । जय शुम्भ-निशुम्भ-कपालधरे, प्रणमामि तु देवि नरार्तिहरे ।।1।। जय चन्द्रदिवाकर नेत्रधरे, जय

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सरस्वती स्तोत्र

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रान्विता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना । या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवै: सदा वन्दिता सा मां पातु सरस्वती भगवती नि:शेषजाड्यापहा ।।1।।

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कनकधारा स्तोत्र

अंग हरे: पुलकभूषणमाश्रयन्ती भृंगांगनेव मुकुलाभरणं तमालम । अंगीकृताखिल विभूतिरपांगलीला मांगल्यदाsस्तु मम मंगलदेवताया: ।।1।। मुग्धा मुहुर्विदधती वदने मुरारे: प्रेमत्रपाप्रणिहितानि गतागतानि ।

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