श्रीरुद्राष्टकम

नमामीशमीशान निर्वाणरूपं, विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपं । निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं, चिदाकाशमाकाशवासं भजेsहं ।।1।। अनुवाद: हे मोक्षस्वरूप, विभु, ब्रह्म और वेदस्वरूप,

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भगवान मर्यादापुरुषोत्तम की आरती

आरती कीजै श्रीरघुबर की । सत चित आनँद शिव सुंदरकी ।।टेक।। दशरथ-तनय कौसिला-नन्दन, सुर-मुनि-रक्षक दैत्य-निकन्दन, अनुगत-भक्त भक्त-उर-चन्दन, मर्यादा पुरुषोत्तम वरकी

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राहुपञ्चविंशतिनामस्तोत्रम

राहुर्दानवमन्त्री च सिंहिकाचित्तनन्दनः । अर्धकायः सदा क्रोधी चन्द्रादित्यविमर्दनः ।।1।। रौद्रो रुद्रप्रियो दैत्यः स्वर्भानुर्भानुभीतिद:। ग्रहराजः सुधापायी राकातिथ्यभिलाषुक: ।।2। कालदृष्टिः कालरूपः श्रीकण्ठहृदयाश्रय:

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