सरस्वती स्तोत्र

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रान्विता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना । या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवै: सदा वन्दिता सा मां पातु सरस्वती भगवती नि:शेषजाड्यापहा ।।1।।

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कनकधारा स्तोत्र

अंग हरे: पुलकभूषणमाश्रयन्ती भृंगांगनेव मुकुलाभरणं तमालम । अंगीकृताखिल विभूतिरपांगलीला मांगल्यदाsस्तु मम मंगलदेवताया: ।।1।। मुग्धा मुहुर्विदधती वदने मुरारे: प्रेमत्रपाप्रणिहितानि गतागतानि ।

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श्री महिषासुरमर्दिनी स्तोत्रम

अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते गिरिवरविन्ध्य शिरोsधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते । भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकृते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्य कपर्दिनि

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शिवताण्डव स्तोत्रम

श्रीरावणकृतं शिवताण्डव स्तोत्रं जटाटवी-गलमज्जल-प्रवाहपावितस्थले, गलेsवलम्ब्य लम्बितां भुजंगतुंग-मालिकाम । डमड्ड्मड्ड्मड्ड्मन्निनादवड्ड्मर्वयं, चकार चण्डताण्डवं तनोतु न: शिव: शिवम ।।1।। जटाकटाह-सम्भ्रमभ्रमन्निलिम्प-निर्झरी, विलोलवीचि-वल्लरी-विराजमानमूर्द्धनि । धगद्धगद्धगज्ज्वलल्ललाट-पट्टपावके,

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श्री शिवाष्टक स्तोत्रम

प्रभुमीशमनीशमशेष गुणं गुणहीनमहीश गरलाभरणम । रण निर्जित दुर्जय दैत्यपुरं, प्रणमामि शिवं शिवकल्पतरुम ।।1।। गिरिराजसुतान्वित-वामतनुं तनुनिन्दितराजित कोटिविधुम । विधिविष्णुशिरोधृत-पादयुगं, प्रणमामि शिवं

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श्रीदशावतारस्तोत्रम

प्रलयपयोधिजले धृतवानसि वेदम । विहितवहित्रचरित्रमखेदम । केशव धृतमीनशरीर जय जगदीश हरे ।।1।। क्षितिरतिविपुलतरे तव तिष्ठति पृष्ठे । धरणिधरणकिणचक्रगरिष्ठे । केशव

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श्री रामरक्षा स्तोत्रम

ऊँ अस्य श्रीरामरक्षास्तोत्रमन्त्रस्य बुधकौशिक ऋषि: श्रीसीता रामचन्द्रो देवता अनुष्टुप् छन्द: सीता शक्ति: श्रीमान् हनुमान् कीलकं श्रीरामचन्द्रप्रीत्यर्थे रामरक्षास्तोत्रजपे विनियोग: । अथ

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श्री सूर्यमण्डलात्मकं स्तोत्रं

नम: सवित्रे जगदेकचक्षुषे जगत्प्रसूतिस्थितिनाशहेतवे । त्रयीमयाय त्रिगुणात्मधारिणे विरंचिनारायणशंकरात्मने ।।1।। यन्मण्डलं दीप्तिकरं विशालं रत्नप्रभं तीव्रमनादिरुपम । दारिद्रयदु:खक्षयकारणं च पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम

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