महाभागवत – देवी पुराण – अठ्ठावनवाँ अध्याय
श्रीमहादेव जी बोले – मुनिश्रेष्ठ ! इस प्रकार छल-पूर्वक पृथ्वी का भार मिटाकर श्रीकृष्ण ने पृथ्वी तल से पुनः अपने
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श्रीमहादेव जी बोले – मुनिश्रेष्ठ ! इस प्रकार छल-पूर्वक पृथ्वी का भार मिटाकर श्रीकृष्ण ने पृथ्वी तल से पुनः अपने
श्रीमहादेव जी बोले – जब पृथ्वी के भार का हरण करने के लिए महाकाली कृष्ण रूप से अपनी सेना को
श्रीमहादेव जी बोले – मुनिश्रेष्ठ ! बहुत काल तक भ्रमण करने के बाद वे महात्मा पांडव प्रत्यक्ष फल देनेवाली भगवती
श्रीनारद जी बोले – पार्वती प्राणवल्लभ महेश्वर ! श्रीकृष्ण-रूपवाली भगवती के चरित्र का संक्षेप में मुझसे वर्णन कीजिए ।।1।। जिस
श्रीमहादेव जी बोले – इस प्रकार श्यामसुंदर श्रीकृष्ण रूप से देवी भगवती ने पृथ्वी के भार स्वरूप दुष्ट चित्त वाले
श्रीमहादेव जी बोले – एक समय की बात है – नारदमुनि वीणा बजाते हुए और भगवान विष्णु की अमृतमयी कथा