श्री सूर्यमण्डलात्मकं स्तोत्रं
नम: सवित्रे जगदेकचक्षुषे जगत्प्रसूतिस्थितिनाशहेतवे । त्रयीमयाय त्रिगुणात्मधारिणे विरंचिनारायणशंकरात्मने ।।1।। यन्मण्डलं दीप्तिकरं विशालं रत्नप्रभं तीव्रमनादिरुपम । दारिद्रयदु:खक्षयकारणं च पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम
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नम: सवित्रे जगदेकचक्षुषे जगत्प्रसूतिस्थितिनाशहेतवे । त्रयीमयाय त्रिगुणात्मधारिणे विरंचिनारायणशंकरात्मने ।।1।। यन्मण्डलं दीप्तिकरं विशालं रत्नप्रभं तीव्रमनादिरुपम । दारिद्रयदु:खक्षयकारणं च पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम
दोहा निश्चय प्रेम प्रतीति ते, विनय करै सनमान । तेहि कारज सकल शुभ, सिद्ध करै हनुमान ।। चौपाई जय हनुमंत
संकट मोचन हनुमाष्टक बाल समय रवि भक्षि लियो तब, तीनहुँ लोक भयो अँधियारो । ताहि सों त्रास भयो जग को,
गजेन्द्र मोक्ष का महत्व गजेन्द्र मोक्ष की पौराणिक कथा महर्षि वेद व्यास द्वारा रचित भगवत पुराण के तीसरे अध्याय में
नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय, भस्मांगरागाय महेश्वराय । नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय, तस्मै ‘न’काराय नम: शिवाय ।।1।। मन्दाकिनी-सलिल-चन्दन-चर्चिताय, नन्दीश्वर-प्रमथनाथ-महेश्वराय । मन्दारपुष्प – बहुपुष्प –
ऊँ आद्य लक्ष्म्यै नम : ऊँ विद्यालक्ष्म्यै नम : ऊँ सौभाग्य लक्ष्म्यै नम : ऊँ अमृतलक्ष्म्यै नम : ऊँ काम