संकट मोचन हनुमाष्टक
संकट मोचन हनुमाष्टक बाल समय रवि भक्षि लियो तब, तीनहुँ लोक भयो अँधियारो । ताहि सों त्रास भयो जग को,
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संकट मोचन हनुमाष्टक बाल समय रवि भक्षि लियो तब, तीनहुँ लोक भयो अँधियारो । ताहि सों त्रास भयो जग को,
गजेन्द्र मोक्ष का महत्व गजेन्द्र मोक्ष की पौराणिक कथा महर्षि वेद व्यास द्वारा रचित भगवत पुराण के तीसरे अध्याय में
नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय, भस्मांगरागाय महेश्वराय । नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय, तस्मै ‘न’काराय नम: शिवाय ।।1।। मन्दाकिनी-सलिल-चन्दन-चर्चिताय, नन्दीश्वर-प्रमथनाथ-महेश्वराय । मन्दारपुष्प – बहुपुष्प –
ऊँ आद्य लक्ष्म्यै नम : ऊँ विद्यालक्ष्म्यै नम : ऊँ सौभाग्य लक्ष्म्यै नम : ऊँ अमृतलक्ष्म्यै नम : ऊँ काम
आरती करत जनक कर जोरे, बड़े भाग्य रामजी घर आए मोरे.. जीत स्वयंवर धनुष चढ़ाए, सब भूपन के गर्व मिटाए..
कहं लगि आरती दास करेंगे, सकल जगत जाकी जोत विराजे, सात समुद्र जाके चरणनि बसे, कहा भये जल कुम्भ भरे