अश्विनी नक्षत्र
भचक्र में शून्य से 13 अंश 20 कला तक का विस्तार अश्विनी नक्षत्र के अधिकार में आता है. अश्विनी नक्षत्र दो
Astrology, Mantra and Dharma
भचक्र में शून्य से 13 अंश 20 कला तक का विस्तार अश्विनी नक्षत्र के अधिकार में आता है. अश्विनी नक्षत्र दो
राशि शब्द का अर्थ विभिन्न तारों का समूह है. आकाश में तारे विशेष प्रकार की आकृति ग्रहण करते हैं जिसके
प्राचीन समय से ही विद्वानों का मत रहा है कि इस सृष्टि की संरचना पांच तत्वों से मिलकर हुई है.
चन्द्रमा को ग्रहों में रानी का दर्जा दिया गया है. यह स्त्री संज्ञक ग्रह है व सबसे शांत ग्रह है.
पंचमहापुरुष योग बनाने के लिए मंगल, बुध, गुरु, शुक्र तथा शनि ग्रह की जरुरत होती है. राहु/केतु तथा सूर्य्/चन्द्र इस
सूर्य को सभी ग्रहों में राजा का दर्जा दिया गया है. सूर्य एक उग्र ग्रह है, इसका शरीर चपटा है