श्री राधा परिहार स्तोत्रम

त्वं देवी जगतां माता विष्णुमाया सनातनी कृष्ण प्राणाधिदेवी च कृष्ण प्राणाधिका शुभा कृष्ण भक्तिं कृष्ण दास्यं देहि मे कृष्ण पूजिते

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सरस्वती स्तोत्र

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रान्विता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना । या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवै: सदा वन्दिता सा मां पातु सरस्वती भगवती नि:शेषजाड्यापहा ।।1।।

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कनकधारा स्तोत्र

अंग हरे: पुलकभूषणमाश्रयन्ती भृंगांगनेव मुकुलाभरणं तमालम । अंगीकृताखिल विभूतिरपांगलीला मांगल्यदाsस्तु मम मंगलदेवताया: ।।1।। मुग्धा मुहुर्विदधती वदने मुरारे: प्रेमत्रपाप्रणिहितानि गतागतानि ।

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श्री महिषासुरमर्दिनी स्तोत्रम

अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते गिरिवरविन्ध्य शिरोsधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते । भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकृते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्य कपर्दिनि

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