कमल नेत्र स्तोत्र
श्री कमल नेत्र कटि पीताम्बर, अधर मुरली गिरधरम । मुकुट कुण्डल कर लकुटिया, सांवरे राधेवरम ।। 1 ।। कूल
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श्री कमल नेत्र कटि पीताम्बर, अधर मुरली गिरधरम । मुकुट कुण्डल कर लकुटिया, सांवरे राधेवरम ।। 1 ।। कूल
इस स्तोत्र का जप जो भी व्यक्ति प्रतिदिन करता है उसे बारह ज्योतिर्लिंगो जैसे दर्शन करने के समान फल की
देवि सुरेश्वरि भगति गंगे त्रिभुवनतारिणि तरलतरंगे । शंकरमौलिविहारिणि विमले मम मतिरास्तां तव पदकमले ।।1।। भागीरथि सुखदायिनि मातस्तव जलमहिमा निगमे ख्यात:
अथ ध्यानम कस्तूरीतिलकं ललाटपटले वक्ष:स्थले कौस्तुभं नासाग्रे वरमौत्तिकं करतले वेणुं करे कंकणम । सर्वाड़्गे हरिचन्दनं सुललितं कण्ठे च मुक्तावलि –
सिन्दूरपूररुचिरो बलवीर्यसिन्धु – र्बुद्धिप्रवाहनिधिरद्भुतवैभवश्री: । दीनार्तिदावदहनो वरदो वरेण्य: संकष्टमोचनविभुस्तनुतां शुभं न: ।। सोत्साहलड़्घितमहार्णवपौरुषश्री – र्लड़्कापुरीप्रदहनप्रथितप्रभाव: । घोराहवप्रमथितारिचमूप्रवीर: प्राभंजनिर्जयति मर्कटसार्वभौम: ।।
हनुमान्श्रीप्रदो वायुपुत्रो रुद्रोsनघोsजर: । अमृत्युर्वीरवीरश्च ग्रामवासो जनाश्रय: ।।1।। धनदो निर्गुणोsकायो वीरो निधिपतिर्मुनि: । पिंड्गाक्षो वरदो वाग्मी सीताशोकविनाशन: ।।2।। शिव: सर्व: