श्रीगणेशप्रात: स्मरणस्तोत्रम्

प्रात: स्मरामि गणनाथमनाथबन्धुं सिन्दूरपूरपरिशोभितगण्डयुग्मम् । उद्दण्डविघ्नपरिखण्डनचण्डदण्ड – माखण्डलादिसुरनायकवृन्दवन्द्यम् ।।1।। हिन्दी अनुवाद : जो इन्द्र आदि देवेश्वरों के समूह से वन्दनीय

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मार्गशीर्ष माह में श्रीपंचमी व्रत कथा

एक बार राजा युधिष्ठिर जी श्रीकृष्ण जी से पूछते हैं – “भगवन तीनों लोकों में लक्ष्मी दुर्लभ है लेकिन व्रत,

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