श्रीराधाष्टकम्
नमस्ते श्रियै राधिकायै परायै नमस्ते नमस्ते मुकुन्दप्रियायै। सदानन्दरूपे प्रसीद त्वमन्त:- प्रकाशे स्फुरन्ती मुकुन्देन सार्धम् ।।1।। अर्थ – श्रीराधिके! तुम्हीं श्री
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नमस्ते श्रियै राधिकायै परायै नमस्ते नमस्ते मुकुन्दप्रियायै। सदानन्दरूपे प्रसीद त्वमन्त:- प्रकाशे स्फुरन्ती मुकुन्देन सार्धम् ।।1।। अर्थ – श्रीराधिके! तुम्हीं श्री
ग्रहों को बल प्रदान करने के लिए रत्न धारण की सलाह आमतौर पर दे दी जाती है लेकिन रत्नों को
महेन्द्र उवाच नमो देव्यै महादेव्यै सुरभ्यै च नमो नम:। गवां बीजस्वरूपायै नमस्ते जगदम्बिके।।1।। नमो राधाप्रियायै च पद्मांशायै नमो नम:। नम:
लाल व पीला ये दोनों रंग मुख्य रंगों में गिने जाते हैं और इन दोनों रंगों के मिलने से नारंगी
लाल रँग को सूर्य और मंगल के अधिकार क्षेत्र में रखा गया है और इस रँग का संबंध गर्मजोशी तथा
जन्म कुंडली में चंद्रमा सबसे ज्यादा सौम्य ग्रह माना जाता है और कुंडली के अनुसार मन का कारक ग्रह है।