श्रावण मास माहात्म्य – चौथा अध्याय

धारणा-पारणा, मासोपवास व्रत और रूद्र वर्तिव्रत वर्णन में सुगंधा का आख्यान ईश्वर बोले – हे सनत्कुमार ! अब मैं धारण-पारण

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श्रीराम स्तोत्र

ऊँ श्रीरामो रामचन्द्रश्च रामभद्रश्च शाश्वत:। राजीवलोचन: श्रीमान् राजेन्द्रो रघुपुंगव: ।। जानकीवल्लभो जैत्रो जितामित्रो जनार्दन:। विश्वामित्रप्रियो दान्त: शरण्यत्राणतत्पर:।। वालिप्रमथनो वाग्मी सत्यवाक्

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चाक्षुषोपनिषद

“चाक्षुषोपनिषद्” अथवा “चाक्षुषी” विद्या समस्त प्रकार के नेत्र रोगों के नाश के लिए पढ़ी जाती है.   ॐ तस्याश्चाक्षुषीविद्याया अहिर्बन्ध्यु

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