श्रावण मास माहात्म्य – चौथा अध्याय
धारणा-पारणा, मासोपवास व्रत और रूद्र वर्तिव्रत वर्णन में सुगंधा का आख्यान ईश्वर बोले – हे सनत्कुमार ! अब मैं धारण-पारण
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धारणा-पारणा, मासोपवास व्रत और रूद्र वर्तिव्रत वर्णन में सुगंधा का आख्यान ईश्वर बोले – हे सनत्कुमार ! अब मैं धारण-पारण
श्रावण माह में की जाने वाली भगवान् शिव की लक्ष पूजा का वर्णन सनत्कुमार बोले – हे भगवन ! आपने
एक समय की बात है, ब्रह्मा आदि देवताओ ने पुष्प आदि विविध उपचारों से महेश्वरी दुर्गा का पूजन किया. इस
ऊँ श्रीरामो रामचन्द्रश्च रामभद्रश्च शाश्वत:। राजीवलोचन: श्रीमान् राजेन्द्रो रघुपुंगव: ।। जानकीवल्लभो जैत्रो जितामित्रो जनार्दन:। विश्वामित्रप्रियो दान्त: शरण्यत्राणतत्पर:।। वालिप्रमथनो वाग्मी सत्यवाक्
“चाक्षुषोपनिषद्” अथवा “चाक्षुषी” विद्या समस्त प्रकार के नेत्र रोगों के नाश के लिए पढ़ी जाती है. ॐ तस्याश्चाक्षुषीविद्याया अहिर्बन्ध्यु
जन्म कुंडली में अगर सभी ग्रहो से परेशानी है तब अकसर नवग्रह शांति पाठ की सलाह दी जाती है लेकिन