चाक्षुषोपनिषद
“चाक्षुषोपनिषद्” अथवा “चाक्षुषी” विद्या समस्त प्रकार के नेत्र रोगों के नाश के लिए पढ़ी जाती है. ॐ तस्याश्चाक्षुषीविद्याया अहिर्बन्ध्यु
Astrology, Mantra and Dharma
“चाक्षुषोपनिषद्” अथवा “चाक्षुषी” विद्या समस्त प्रकार के नेत्र रोगों के नाश के लिए पढ़ी जाती है. ॐ तस्याश्चाक्षुषीविद्याया अहिर्बन्ध्यु
जन्म कुंडली में अगर सभी ग्रहो से परेशानी है तब अकसर नवग्रह शांति पाठ की सलाह दी जाती है लेकिन
मनोनिवृत्ति: परमोपशान्ति: सा तीर्थवर्या मणिकर्णिका च। ज्ञानप्रवाहा विमलादिगंगा सा काशिकाSहं निजबोधरूपा।।1।। यस्यामिदं कल्पितमिन्द्रजालं चराचरं भाति मनोविलासम्। सच्चित्सुखैका परमात्मरूपा सा
ध्यानम् गलदरक्तमुण्डावलीकण्ठमाला महाघोररावा सुदंष्ट्रा कराला। विवस्त्रा श्मशानालया मुक्तकेशी महाकालकामाकुला कालिकेयम्।।1।। अर्थ – ये भगवती कालिका गले में रक्त टपकते हुए
चिदाकारो धाता परमसुखद: पावनतनु- र्मुनीन्द्रैर्योगीन्द्रैर्यतिपतिसुरेन्द्रैर्हनुमता । सदा सेव्य: पूर्णो जनकतनयांग: सुरगुरू रमानाथो रामो रमतु मम चित्ते तु सततम्।।1।। मुकुन्दो