महाभागवत – देवीपुराण – चवालीसवाँ अध्याय
श्रीराम जी बोले – त्रिलोकवंदनिया ! युद्ध में विजय देनेवाली ! कात्यायनी ! आपको बार-बार नमस्कार है। मुझ पर प्रसन्न
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श्रीराम जी बोले – त्रिलोकवंदनिया ! युद्ध में विजय देनेवाली ! कात्यायनी ! आपको बार-बार नमस्कार है। मुझ पर प्रसन्न
श्रीमहादेवजी बोले – महामुने ! ब्रह्माजी के मुख से इस प्रकार की बात सुनकर प्रसन्नात्मा विमल बुद्धिवाले रघुश्रेष्ठ श्रीराम ने
श्रीमहादेव जी बोले – इस प्रकार युद्ध में पराजित राक्षसों के स्वामी रावण ने युद्ध करने के लिए महाबलि कुंभकर्ण
श्रीमहादेवजी बोले – मारीच को मारकर जब श्रीराम लक्ष्मण के साथ जब अपनी पर्णकुटी पर आए, तब उन्होंने वहां जानकी
श्रीमहादेवजी बोले – नारदजी ! मुनिश्रेष्ठ वसिष्ठ जी ने महाबाहु राम, लक्ष्मण, भरत तथा शत्रुघ्न को देवी के मंत्र की
श्रीमहादेव जी बोले – भगवती के ऐसे वचन सुनकर नेत्रों में आह्लाद भरे हुए भगवान विष्णु ने उन्हें भक्तिपूर्वक पुनः