कार्तिक माह माहात्म्य – चौदहवाँ अध्याय

कार्तिक मास का आज, लिखूं चौदहवाँ अध्याय। श्री हरि कृपा करें, श्रद्धा प्रेम बढाएँ।। तब उसको इस प्रकार धर्मपूर्वक राज्य

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कार्तिक माह माहात्म्य – तेरहवाँ अध्याय

कार्तिक कथा को सुनो, सभी सहज मन लाय। तेरहवाँ अध्याय लिखूँ, श्री प्रभु शरण में आय।। दोनो ओर से गदाओं,

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कार्तिक माह माहात्म्य – बारहवाँ अध्याय

सुख भोगे जो कथा, सुने सहित विश्वास। बारहवाँ अध्याय लिखे, ‘कमल’ यह दास।। नारद जी ने कहा – तब इन्द्रादिक

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कार्तिक माह माहात्म्य – ग्यारहवाँ अध्याय

जिसको जप कर जीव, हो भवसागर से पार। ग्यारहवें अध्याय का, ‘कमल’ करे विस्तार।। एक बार सागर पुत्र जलन्धर अपनी

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कार्तिक माह माहात्म्य – दसवाँ अध्याय

मायापति नारायण के, चरणों में सीस नवाय। दसवाँ अध्याय कार्तिक, लिखूं नारायण राय।। राजा पृथु बोले – हे ऋषिश्रेष्ठ नारद

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