कार्तिक माह माहात्म्य – तीसरा अध्याय

श्रीकृष्ण भगवान के चरणों में शीश झुकाओ। श्रद्धा भाव से पूजो हरि, मनवांछित फल पाओ।। सत्यभामा ने कहा – हे

Continue reading

कार्तिक माह माहात्म्य – दूसरा अध्याय

सिमर चरण गुरुदेव के, लिखूं शब्द अनूप। कृपा करें भगवान, सतचितआनन्द स्वरूप।। भगवान श्रीकृष्ण आगे बोले – हे प्रिये! जब

Continue reading

कार्तिक माह माहात्म्य – पहला अध्याय

मैं सिमरूँ माता शारदा, बैठे जिह्वा आये। कार्तिक मास की कथा, लिखे ‘कमल’ हर्षाये।। नैमिषारण्य तीर्थ में श्रीसूतजी ने अठ्ठासी

Continue reading

श्रीयमुनाष्टकम्

मुरारिकायकालिमा ललामवारिधारिणी तृणीकृतत्रिविष्टपा त्रिलोकशोकहारिणी। मनोSनुकूलकूल कुंजपुंजधूतदुर्मदा धुनोतु मे मनोमलं कलिन्दनन्दिनी सदा।।1।।   मलापहारिवारिपूरभूरिमण्डितामृता भृशं प्रपातकप्रवंचनातिपण्डितानिशम्। सुनन्दनन्दनांगसंगरागरंजिता हिता। धुनोतु0।।2।।   लसत्तरंगसंगधूत

Continue reading

error: Content is protected !!