गरुड़ पुराण – चौदहवाँ अध्याय

यमलोक एवं यमसभा का वर्णन, चित्रगुप्त आदि के भवनों का परिचय, धर्मराज नगर के चार द्वार, पुण्यात्माओं का धर्म सभा

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गरुड़ पुराण – तेरहवाँ अध्याय

अशौचकाल का निर्णय, अशौच में निषिद्ध कर्म, सपिण्डीकरण श्राद्ध, पिण्डमेलन की प्रक्रिया, शय्यादान, पददान तथा गया श्राद्ध की महिमा  

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गरुड़ पुराण – बारहवाँ अध्याय

एकादशाहकृत्य-निरुपण, मृत-शय्यादान, गोदान, घटदान, अष्टमहादान, वृषोत्सर्ग, मध्यमषोडशी, उत्तमषोडशी एवं नारायणबलि   गरुड़ उवाच गरुड़जी ने कहा – हे सुरेश्वर !

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