स्वधा स्तोत्रम्

ब्रह्मोवाच – Brahmovach स्वधोच्चारणमात्रेण तीर्थस्नायी भवेन्नर:। मुच्यते सर्वपापेभ्यो वाजपेयफलं लभेत्।।1।। अर्थ – ब्रह्मा जी बोले – ‘स्वधा’ शब्द के उच्चारण

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शीतलाष्टकम्

अस्य श्रीशीतलास्तोत्रस्य महादेव ऋषि:, अनुष्टुप् छन्द:, शीतला देवता, लक्ष्मी बीजम्, भवानी शक्ति:, सर्व-विस्फोटकनिवृत्तय अर्थ – इस श्रीशीतला स्तोत्र के ऋषि

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श्रीसरस्वती स्तोत्रम्

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवै: सदा वन्दिता सा मां पातु सरस्वती भगवती नि:शेषजाड्यापहा।।1।।   आशासु

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नीलसरस्वती स्तोत्रम्

घोररूपे महारावे सर्वशत्रुभयंकरि। भक्तेभ्यो वरदे देवि त्राहि मां शरणागतम्।।1।। ऊँ सुरासुरार्चिते देवि सिद्धगन्धर्वसेविते। जाड्यपापहरे देवि त्राहि मां शरणागतम्।।2।। जटाजूटसमायुक्ते लोलजिह्वान्तकारिणि।

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खग्रास सूर्यग्रहण 21/22 अगस्त 2017

यह सूर्यग्रहण भाद्रपद अमावस्या, दिन सोमवार, अगस्त माह की 21/22 की अर्धरात्रि में लगेगा(भारतीय समयानुसार आधी रात). भारतीय समयानुसार ग्रहण

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