कार्तिक मास में आकाशदीप की महिमा
कार्तिक महीने में आकाशदीप का भी महत्व माना गया है. जो व्यक्ति कार्तिक मास आने पर प्रात:काल स्नान करके आकाशदीप
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कार्तिक महीने में आकाशदीप का भी महत्व माना गया है. जो व्यक्ति कार्तिक मास आने पर प्रात:काल स्नान करके आकाशदीप
कार्तिक मास में जो भी व्रत आदि रखता है उसे सदा एक पहर रात बचते ही उठ जाना चाहिए फिर
कार्तिक स्नान आश्विन माह की पूर्णिमा से प्रारंभ होकर अगले माह कार्तिक माह की पूर्णिमा पर समाप्त होता है. इस
अपराजिता की बेल दो प्रकार की पाई जाती हैं – नीले फूल वाली और सफेद फूल वाली. दोनों ही बेलों
श्रीगणेशाय नम: रुद्राष्टाध्यायी में कुल आठ पाठ हैं जिसमें पाँचवाँ पाठ मुख्य है. यदि किसी व्यक्ति के पास समय का
खण्डग्रास चन्द्रग्रहण आषाढ़ माह की पूर्णिमा को मंगलवार को 16/17 जुलाई की मध्यरात्रि में समस्त भारत में खण्डग्रास के रुप