अशक्त अवस्था में कार्तिक व्रत का निर्वाह
यहाँ अशक्त अवस्था का अर्थ है कि जब व्यक्ति किसी भी कारण से व्रत रखने में असमर्थ है चाहे वह
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यहाँ अशक्त अवस्था का अर्थ है कि जब व्यक्ति किसी भी कारण से व्रत रखने में असमर्थ है चाहे वह
शालिग्राम शिला में सदैव चराचर जीवों सहित संपूर्ण त्रिलोकी लीन रहती है. कार्तिक मास में शालिग्राम शिला के दर्शन करने
भीष्म पंचक व्रत विधि भीष्म पंचक व्रत कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी से पूर्णिमा तक मनाया जाता है. इस व्रत
द्वापर युग का आरम्भ कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की नवमी को हुआ था. यदि कोई भी व्यक्ति नवमी से
कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को वैकुण्ठ चतुर्दशी भी कहा जाता है. इस दिन आंवले का पूजन किया
ब्रह्मा जी कहते हैं – “जो भक्त कार्तिक महीने में ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान कर पवित्र हो तुलसी दल से